गौरव कोचर
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब एक बड़े राजनीतिक भूकंप में बदल चुकी है। पार्टी के बागी विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दावा किया है कि उनके पास 59 विधायकों (MLAs) का मजबूत समर्थन है।
इस बगावत के बाद से बंगाल के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। नारे दिए जा रहे हैं कि ‘मूल’ (जड़) से ही ‘तृण’ (घास) उखड़ चुका है, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।
बगावत की मुख्य वजहें: क्यों टूटने की कगार पर है TMC?
भीतरखाने से मिल रही खबरों के अनुसार, यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि लंबे समय से पनप रहे असंतोष का नतीजा है:
- शीर्ष नेतृत्व से नाराजगी: बागी गुट का आरोप है कि पार्टी में पुराने और जमीनी नेताओं की अनदेखी कर कुछ खास चेहरों को तरजीह दी जा रही है।
- निर्णय लेने में तानाशाही: विधायकों का कहना है कि सरकार और संगठन के बड़े फैसलों में उनकी राय को पूरी तरह से दरकिनार किया जा रहा था।
- भ्रष्टाचार के आरोप और अंदरूनी कलह: हाल के दिनों में कई मुद्दों को लेकर पार्टी के भीतर अंतर्विरोध खुलकर सामने आ रहा था, जिसने अब इस बड़े विद्रोह का रूप ले लिया है।
आंकड़ों का खेल: क्या खतरे में है ममता सरकार?
बागी विधायकों का 59 का आंकड़ा पश्चिम बंगाल विधानसभा के गणित को पूरी तरह से हिला देने वाला है। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो विधानसभा में सीटों का समीकरण कुछ इस तरह बदल सकता है:
बड़ी बात: यदि यह 59 विधायक विधानसभा में पार्टी लाइन के खिलाफ जाते हैं या इस्तीफा देते हैं, तो ममता बनर्जी की सरकार पर गिरने का वास्तविक खतरा मंडराने लगेगा।
आगे क्या? राजनीति के 3 संभावित परिदृश्य
- फ्लोर टेस्ट (Floor Test): विपक्ष इस स्थिति का फायदा उठाकर तुरंत राज्यपाल से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और सरकार को बहुमत साबित करने (Floor Test) की मांग कर सकता है।
- कैंप पॉलिटिक्स और दलबदल कानून: TMC नेतृत्व इस वक्त अपने बाकी बचे विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गया है। बागी विधायकों पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत कार्रवाई की तलवार भी लटक सकती है, बशर्ते बागी गुट के पास पार्टी को वैधानिक रूप से तोड़ने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत न हो।
- ममता बनर्जी का ‘डैमेज कंट्रोल’: राजनीति की माहिर खिलाड़ी मानी जाने वालीं ममता बनर्जी खुद मोर्चा संभाल सकती हैं। बागियों को मनाने या फिर इस संकट से पार पाने के लिए वह कोई बड़ा दांव खेल सकती हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस महासंग्राम पर विपक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा है कि “यह तो होना ही था, जो सरकार अहंकार और भ्रष्टाचार के दम पर चल रही हो, उसका अंत ऐसा ही होता है।” वहीं दूसरी ओर, TMC के आधिकारिक प्रवक्ताओं का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और यह दावा सिर्फ एक अफवाह या विपक्ष की साजिश है।
अब देखना यह होगा कि क्या ममता बनर्जी इस राजनीतिक चक्रव्यूह को भेद पाती हैं, या फिर बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने वाली है। पल-पल बदलते घटनाक्रम पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।