SKIT में पांच दिवसीय कार्यशाला संपन्न: शोध की दुनिया में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की भूमिका पर मंथन

SKIT में पांच दिवसीय कार्यशाला संपन्न: शोध की दुनिया में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की भूमिका पर मंथन

जयपुर | 25 जनवरी 2026

| योगेश शर्मा

​आज के डिजिटल युग में शोध (Research) की गुणवत्ता और गति बढ़ाने के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) एक अनिवार्य उपकरण बन चुका है। इसी विषय की महत्ता को देखते हुए जयपुर के स्वामी केशवानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट एवं ग्रामोत्थान (SKIT) के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन हुआ।

“एआई-संचालित शोध: उपकरण, तकनीकें एवं अनुप्रयोग” विषय पर आधारित इस कार्यशाला ने शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को भविष्य की तकनीक से रूबरू कराया।

​शोध प्रक्रियाओं में एआई का व्यावहारिक प्रशिक्षण

​कार्यशाला की मुख्य वक्ता सिम्बायोसिस (पुणे) की कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग की पूर्व प्रोफेसर डॉ. प्रीति मुलाय रहीं। उन्होंने अपने विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को बताया कि कैसे एआई केवल इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है।

​प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  • शोध-अंतराल (Research Gap) की पहचान: एआई टूल्स के जरिए मौजूदा साहित्य की समीक्षा कर नए शोध विषयों को खोजना।
  • डेटा विजुअलाइजेशन: जटिल डेटा को एआई की मदद से सरल और प्रभावी ग्राफिक्स में बदलना।
  • स्टोरीटेलिंग तकनीक: शोध पत्रों को अधिक रोचक और प्रभावशाली बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग।
  • व्यावहारिक उपयोग: विभिन्न एआई सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम का लाइव डेमो और प्रशिक्षण।

​कुशल समन्वय और उत्साहजनक प्रतिक्रिया

​कार्यशाला का कुशल समन्वयन डॉ. अनुप्रिया सिंह, डॉ. शिप्रा मलिक और रौनक गोस्वामी द्वारा किया गया। पांच दिनों तक चले इस गहन शैक्षणिक सत्र में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने फीडबैक में बताया कि यह कार्यशाला उनके शोध कार्यों को अधिक सटीक और आधुनिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

​समापन एवं आभार

​कार्यक्रम का औपचारिक समापन डॉ. शिप्रा मलिक के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने कार्यशाला के निष्कर्षों को साझा करते हुए प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अंत में डॉ. अनुप्रिया सिंह ने मुख्य वक्ता डॉ. प्रीति मुलाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अनुभवों ने संस्थान के शोध वातावरण को एक नई ऊर्जा प्रदान की है।

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