जयपुर/योगेश शर्मा /स्वामी केशवानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट एंड ग्रामोथान (एसकेआईटी / SKIT), जयपुर के कंप्यूटर साइंस विभाग द्वारा आयोजित ‘बिल्डिंग डिजिटल ट्रस्ट: ए सिंपोज़ियम ऑन साइबर फ्रॉड प्रिवेंशन एंड पब्लिक अवेयरनेस’ विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
इस तीन दिवसीय संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को तेजी से बढ़ते साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा गोपनीयता (Data Privacy), साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के नैतिक तथा जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना था।
संगोष्ठी का दिन-वार विवरण और विशेषज्ञों के संबोधन
🔹 प्रथम दिन: साइबर खतरों की समझ और हैकर की मानसिकता
संगोष्ठी के उद्घाटन दिवस पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ विजयंत गौड़, हरीश इंदौरिया एवं डॉ. रक्षित टंडन ने मुख्य सत्रों को संबोधित किया:
- उभरते साइबर खतरे: वक्ताओं ने हैकर की मानसिकता, डार्क वेब (Dark Web), फिशिंग (Phishing), यूपीआई (UPI) फ्रॉड और पहचान की चोरी (Identity Theft) जैसे ज्वलंत विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
- जागरूकता और सत्यापन: विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता, सत्यापन और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार भी उतना ही आवश्यक है।
- कौशल विकास: सत्रों के दौरान व्यावहारिक प्रदर्शन (Practical Demonstration), साइबर सुरक्षा टूल्स, इंटर्नशिप के अवसर और उद्योग-उन्मुख सीखने की दिशा में भी मार्गदर्शन दिया गया।
🔹 दूसरा दिन: डेटा प्राइवेसी, रैनसमवेयर और सेफ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट
दूसरे दिन डेटा सुरक्षा, साइबर फ्रॉड नियंत्रण और सुरक्षित सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर गहन मंथन हुआ:
- बैंकिंग और डिजिटल प्राइवेसी: ए यू स्मॉल फाइनेंस बैंक के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हरीश इंदौरिया ने डेटा ब्रीच, पासवर्ड रिकवरी, ‘मैन-इन-द-मिडिल’ (MITM) अटैक, डीपफेक, ऑनलाइन फ्रॉड और SSL/TLS सर्टिफिकेट के महत्व को रेखांकित किया।
- साइबर जांच व करियर अवसर: सेंट्रल डिटेक्टिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (CDTI) चंडीगढ़ के साइबर क्राइम फैकल्टी डॉ. गुरूचरण सिंह ने रैनसमवेयर (Ransomware) के वास्तविक उदाहरण दिए। उन्होंने एनआईए (NIA) और एनटीआरओ (NTRO) जैसी राष्ट्रीय सुरक्षा जांच संस्थाओं में उपलब्ध करियर के अवसरों पर प्रकाश डाला।
- सॉफ्टवेयर सुरक्षा: भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल अजय गर्ग ने स्टक्सनेट (Stuxnet), डीपफेक और बफर ओवरफ्लो जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए SBOM, AAA सिक्योरिटी मॉडल, SAST, DAST और वायरसटोटल (VirusTotal) जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।
🔹 तीसरा दिन: साइबर फॉरेंसिक्स, क्रिप्टोग्राफी और AI कानून
संगोष्ठी के अंतिम दिन डिजिटल साक्ष्य, क्रिप्टोग्राफी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कानूनी पहलुओं पर केंद्रित रहा:
- डिजिटल फॉरेंसिक्स: SKIT के आईटी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज रमन ने डिजिटल साक्ष्यों के संग्रह, संरक्षण, मोबाइल फॉरेंसिक्स, वित्तीय धोखाधड़ी जांच और ‘मैग्नेट एक्सिम’ (Magnet AXIOM) जैसे फॉरेंसिक टूल्स का व्यावहारिक ज्ञान साझा किया।
- गणितीय क्रिप्टोग्राफी: LNMIIT जयपुर के प्रोफेसर प्रो. जयप्रकाश कर ने डिजिटल सिग्नेचर, की-एक्सचेंज प्रोटोकॉल, RSA एल्गोरिदम और सुरक्षित डिजिटल संचार में क्रिप्टोग्राफी के गणितीय सिद्धांतों को समझाया।
- AI का जिम्मेदार उपयोग और कानून: राजस्थान हाई कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. क्षितिज वर्मा ने ‘रिस्पॉन्सिबल यूज़ ऑफ एआई इन साइबर लॉज़’ पर अपने विचार रखे। उन्होंने डीपफेक, फर्जी डिजिटल साक्ष्य, गलत सूचना (Misinformation), LLMs, डेटा गोपनीयता, जवाबदेही, AI विनियमन और AI के पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा की।
वैलेडिक्टरी समारोह और धन्यवाद ज्ञापन
संगोष्ठी का समापन एक भव्य वैलेडिक्टरी समारोह (Valedictory Ceremony) और प्रमाण-पत्र वितरण के साथ हुआ।
समारोह के अंत में डॉ. विनय कनुंगो ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी आमंत्रित विशेषज्ञों, अतिथियों, शिक्षकों, आयोजकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी का मुख्य संदेश:
तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ने विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया की साइबर चुनौतियों से जोड़ते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि एक मजबूत ‘डिजिटल ट्रस्ट’ के निर्माण के लिए तकनीकी दक्षता, जागरूकता, डेटा सुरक्षा और निरंतर सीखना (Continuous Learning) अनिवार्य है।