​”S-400 से भी ज्यादा घातक होगा भारत का ‘प्रोजेक्ट कुशा’, जानिए M1, M2 और M3 मिसाइलों की ताकत”

नरेश गुनानी/भारत का प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha) एक महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया जा रहा है। इसे Long-Range Surface-to-Air Missile (LR-SAM) प्रणाली के रूप में तैयार किया जा रहा है, जो रूस के प्रसिद्ध S-400 ट्रायम्फ और अमरीका के Patriot / THAAD एयर डिफेंस सिस्टम को टक्कर देगा।

​यह भारत को एक अभेद्य तीन-स्तरीय (Multi-Layered) हवाई सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

1. तीन-स्तरीय इंटरसेप्टर मिसाइलें (M1, M2, M3)

​प्रोजेक्ट कुशा की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टी-लेयर्ड इंटरसेप्शन सिस्टम है। दुश्मन के विभिन्न प्रकार के खतरों (लड़ाकू विमान, स्टील्थ जेट, ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें) से निपटने के लिए इसमें तीन रेंज की मिसाइलें शामिल हैं:

1. तीन-स्तरीय इंटरसेप्टर मिसाइलें (M1, M2, M3)

​प्रोजेक्ट कुशा की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टी-लेयर्ड इंटरसेप्शन सिस्टम है। दुश्मन के विभिन्न प्रकार के खतरों (लड़ाकू विमान, स्टील्थ जेट, ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें) से निपटने के लिए इसमें तीन रेंज की मिसाइलें शामिल हैं:

मिसाइल वैरिएंट

प्रभावी रेंज (Range)

मुख्य लक्ष्य (Targets)

M1 मिसाइल

~150 किमी

कम और मध्यम दूरी के खतरे जैसे फाइटर जेट, ड्रोन, क्रूज मिसाइलें

M2 मिसाइल

~250 किमी

मध्यम से लंबी दूरी के स्टील्थ विमान, AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग) और रिफ्यूलर एयरक्राफ्ट

M3 मिसाइल

~350 – 400 किमी

लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें, हाई-एल्टीट्यूड बॉम्बर्स और बड़े रणनीतिक लक्ष्य

2. तकनीकी विशेषताएं और क्षमताएं
  • सिंगल कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम: यह सिस्टम एक ही रडार और कमांड सेंटर से तीनों (M1, M2, M3) मिसाइलों को दागाने और नियंत्रित करने में सक्षम है।
  • उन्नत रडार (AESA Radar): इसमें अत्याधुनिक Active Electronically Scanned Array (AESA) रडार का उपयोग किया गया है, जो 500 किमी से अधिक दूरी पर सैकड़ों लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता है।
  • उच्च सफलता दर (Kill Probability): डीआरडीओ के अनुसार, इस प्रणाली की सिंगल-शॉट किल प्रोबेबिलिटी (SSKP) 80% से अधिक और दो मिसाइलों के संयोजन (Salvo Mode) में 90% से अधिक है।
  • स्टील्थ खतरों को निष्क्रिय करना: यह आधुनिक 5th-Gen स्टील्थ फाइटर जेट्स को भी पकड़ने और नष्ट करने की क्षमता रखता है।
​3. भारत के लिए रणनीतिक महत्व
    1. आत्मानिर्भर भारत: वर्तमान में भारत रूस के S-400 सिस्टम पर निर्भर है। प्रोजेक्ट कुशा के भारतीय वायु सेना में शामिल होने से विदेशी रक्षा खरीद पर भारत की निर्भरता काफी कम होगी।
    2. चीन और पाकिस्तान से दोहरे मोर्चे की सुरक्षा: भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर दुश्मन के हवाई हमलों और मिसाइल खतरों से निपटने के लिए यह 400 किमी की सुरक्षा दीवार खड़ा करेगा।
    3. लागत में बचत: स्वदेशी तकनीक से बने होने के कारण इसका रखरखाव और भविष्य का अपग्रेड विदेशी सिस्टम्स के मुकाबले काफी सस्ता और सुलभ होगा।

वर्तमान स्थिति: प्रोजेक्ट कुशा के पहले चरण के परीक्षण और डेवलपमेंट ट्रायल सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय वायु सेना (IAF) इसे अपनी ‘सुदर्शन चक्र’ (Sudarshan Chakra) एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली के तहत तैनात करने की योजना बना रही है।

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