रांची/ नेहा रंजन/झारखंड के सरकारी अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों के लिए संघर्षरत संगठन JHAROTEF (झारखंड ऑफिसर्स, टीचर्स एंड एप्लॉइज फेडरेशन) ने राज्य सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। एमएसीपी (MACP), शिशु शिक्षण भत्ता, सेवा विस्तार और परिवहन भत्ता जैसी कई वर्षों से लंबित और ज्वलंत मांगों को लेकर फेडरेशन ने ‘संवाद, समन्वय और संघर्ष’ की नीति के तहत प्रखंड से लेकर राज्य स्तर तक चरणबद्ध आंदोलन का शंखनाद कर दिया है।
फेडरेशन का साफ कहना है कि अगर समय रहते सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो राज्य के तमाम कर्मचारी “पाने अपना अधिकार, चलो मुख्यमंत्री के द्वार” के नारे के साथ मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे।
क्या हैं JHAROTEF की मुख्य मांगें?
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, राज्य सरकार लगातार उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। फेडरेशन के चार्टर ऑफ डिमांड में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:
- MACP का लाभ: लंबे समय से लंबित संशोधित सुनिश्चित करियर प्रोन्नयन योजना (MACP) को लागू करना।
- भत्ते व सेवा विस्तार: शिशु शिक्षण भत्ता और परिवहन भत्ता लागू करने के साथ-साथ सेवा विस्तार की आयु सीमा को बढ़ाकर 62 वर्ष करना।
- दमनकारी नीतियों का विरोध: विभिन्न सेवाओं की नियमावलियों में किए गए कर्मचारी-विरोधी संशोधनों को तत्काल वापस लेना।
- भ्रष्टाचार पर लगाम: शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और विभाग के आला अधिकारियों के कथित भ्रष्ट व दमनकारी आचरण के खिलाफ कार्रवाई।
आंदोलन का पूरा शेड्यूल: चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा दबाव
JHAROTEF ने अपनी रणनीति को बेहद सुनियोजित तरीके से तैयार किया है। संगठन राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है:
|
तिथि / अवधि |
आंदोलन का स्वरूप व कार्यक्रम |
|---|---|
|
05 जुलाई से 19 जुलाई |
प्रखंड एवं जिला कार्यकारिणी का पुनर्गठन। इसके साथ ही सत्तारूढ़ दल के प्रखंड अध्यक्षों से समर्थन-पत्र हासिल करने का अभियान। |
|
21 जुलाई से 26 जुलाई |
सत्तारूढ़ दल के माननीय विधायकों से मिलकर अनुशंसा-पत्र लेना और आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर प्रश्न उठाने का आग्रह करना। |
|
29 जुलाई से 02 अगस्त |
राज्यव्यापी “मुख्यमंत्री को पत्र” अभियान, जिसके तहत हजारों कर्मचारी सीधे सीएम को पत्र भेजेंगे। |
|
08 अगस्त से 14 अगस्त |
सत्तारूढ़ दल के जिला अध्यक्षों से मिलकर अपनी मांगों के पक्ष में समर्थन-पत्र जुटाना। |
|
16 अगस्त |
प्रांतीय कमेटी एवं जिला अध्यक्षों की संयुक्त समीक्षा बैठक, जिसमें आंदोलन के अगले रुख की समीक्षा होगी। |
|
05 सितंबर (शिक्षक दिवस) |
राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस। इस दिन शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कर्मचारी-विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। |
अंतिम चेतावनी: यदि 5 सितंबर के प्रतिवाद दिवस तक भी सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान या वार्ता की पहल नहीं होती है, तो फेडरेशन पूरे राज्य के कर्मचारियों के साथ “चलो मुख्यमंत्री के द्वार” महा-आंदोलन के तहत मुख्यमंत्री आवास तक ऐतिहासिक राज्य स्तरीय पदयात्रा करेगा।
“एकजुटता ही हमारा बल है”
JHAROTEF के शीर्ष नेतृत्व ने राज्य के तमाम सरकारी अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा और सम्मानजनक सेवा-शर्तों को हासिल करने के लिए इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। संगठन का मानना है कि ‘संवाद और समन्वय’ के रास्ते बंद होने की स्थिति में ‘संघर्ष’ ही एकमात्र विकल्प बचता है। अब देखना यह होगा कि कर्मचारियों के इस बड़े कदम पर राज्य सरकार का क्या रुख रहता है।