जोधपुर / नई दिल्ली/ नरेश गुनानी/भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर की सॉफ्टवेयर इनोवेशन लैब ने वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावी समाधान देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर, एज कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट तकनीक विकसित की है। यह शोध विशेष रूप से ग्रामीण स्वास्थ्य, कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में शिक्षा और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की निगरानी पर केंद्रित है।
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के सह-आचार्य डॉ. सुमित कालरा के नेतृत्व में संचालित यह लैब केवल एल्गोरिदम बनाने के बजाय विश्वसनीय, किफायती और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में आसानी से लागू होने वाले संपूर्ण सिस्टम तैयार कर रही है।
प्रमुख शोध क्षेत्र और नवाचार:
- सुलभ एवं किफायती स्मार्ट हेल्थकेयर: दूरदराज के क्षेत्रों के लिए पोर्टेबल डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। यह सिस्टम मेडिकल सेंसर, मरीज के रिकॉर्ड और AI विश्लेषण को जोड़कर बीमारियों की शुरुआती पहचान और निरंतर निगरानी करता है। मेडिकल संस्थानों और आयुर्वेदिक अस्पतालों के सहयोग से आवाज के आधार पर ‘प्रकृति’ पहचान और चाल विश्लेषण (Gait Analysis) जैसी तकनीकों पर भी काम चल रहा है।
- शिक्षा के लिए ‘Teacher-in-the-Loop AI’: कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग के सहयोग से विकसित यह प्रणाली AI क्षमता को शिक्षकों के अनुभव के साथ जोड़ती है। यह कम इंटरनेट और सीमित कंप्यूटिंग क्षमता वाले उपकरणों पर भी सहजता से काम करती है। इसे भारत, घाना, जिम्बाब्वे, केन्या और नाइजीरिया सहित 5 राष्ट्रमंडल देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
- AIoT और स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग: लैब ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑफ थिंग्स (AIoT) और स्मार्ट सेंसर नेटवर्क के जरिए पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की स्थिति की निगरानी के लिए सिस्टम बनाया है। इससे संरचनात्मक कमजोरियों की पहचान समय रहते हो सकेगी, जिससे रखरखाव की लागत घटेगी और जनसुरक्षा मजबूत होगी।
डॉ. सुमित कालरा के अनुसार, इस शोध का मुख्य उद्देश्य तकनीकी नवाचार और समाज की जमीनी जरूरतों के बीच की खाई को पाटना है, ताकि तकनीक का प्रत्यक्ष लाभ उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है।