गौरव कोचर/पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में महीनों से जारी भीषण युद्ध और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट के बीच एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका (US) और ईरान एक ऐतिहासिक और बड़े समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों के लिए पूरी तरह से जंग थम जाएगी (Ceasefire) और दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से मिले संकेतों के मुताबिक, दोनों देश एक विस्तृत समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं।
क्या है यह MoU और इसकी सबसे खास बातें?
इस 60 दिनों के अस्थायी शांति समझौते (Truce) का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पूरी तरह से युद्ध को रोकना और वैश्विक तेल संकट को समाप्त करना है। इस मसौदे (Draft MoU) की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
1. बिना किसी ‘टोल टैक्स’ के खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
इस समझौते की सबसे पहली और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को वैश्विक शिपिंग के लिए तुरंत और पूरी तरह खोलेगा। इसके लिए ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजों से कोई टैक्स या टोल शुल्क नहीं वसूलेगा।
2. समुद्र से हटेंगी बारूदी सुरंगें (Demining Operations)
तनाव के दौरान समुद्र में बिछाई गई घातक बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को हटाने पर ईरान सहमत हुआ है। जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए इस डिमाइनिंग ऑपरेशन में अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश भी तकनीकी रूप से मदद करेंगे।
3. अमेरिका हटाएगा समुद्री नाकेबंदी (Blockade)
जैसे ही ईरान इस जलडमरूमध्य (Strait) को खोलेगा, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी सख्त समुद्री नाकेबंदी को तुरंत हटा लेगा। इसके साथ ही ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वतंत्र रूप से कच्चा तेल (Crude Oil) बेचने की अनुमति दी जाएगी और कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलेगी।
4. परमाणु कार्यक्रम पर रोक और यूरेनियम पर बातचीत
60 दिनों के इस सीजफायर के दौरान दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर बातचीत होगी।
- ईरान इस बात के लिए प्रतिबद्धता जताएगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा।
- ईरान के पास मौजूद लगभग 440 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को नष्ट करने या वहां से हटाने पर भी बातचीत की जाएगी, जिसमें अमेरिकी अधिकारी सीधे तौर पर वेरिफिकेशन (सत्यापन) करना चाहते हैं।
5. लेबनान और हिज्बुल्लाह का एंगल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के दायरे में लेबनान मोर्चे को भी शामिल करने की कोशिश की जा रही है। तय शर्तों के अनुसार, यदि हिज्बुल्लाह शांत रहता है, तो इजरायल भी अपने हमले रोकेगा। हालांकि, यदि हिज्बुल्लाह की ओर से कोई उकसावे वाली कार्रवाई होती है, तो इजरायल को जवाबी कार्रवाई का अधिकार होगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिलेगी बड़ी राहत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वो सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट’ है, जहां से वैश्विक तेल का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस युद्ध के कारण यह मार्ग बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं और ऊर्जा संकट गहरा गया था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इस समझौते के लागू होते ही वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, जिससे पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
क्या है मौजूदा स्थिति?
हालांकि बातचीत अपने अंतिम चरण में है और मध्यस्थ देश (जैसे कतर और पाकिस्तान) कूटनीतिक रूप से अंतिम बारीकियों को सुलझाने में जुटे हैं, लेकिन इजरायल इस पूरी वार्ता प्रक्रिया से खुद को अलग रखे हुए है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि वे इस डील का हिस्सा नहीं हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि यह समझौता अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित में एक बेहद मजबूत कदम है।
आगामी कुछ घंटों में दोनों देशों की ओर से इस पर आधिकारिक मुहर लगने की पूरी संभावना है, जिसके बाद युद्ध विराम लागू हो जाएगा।