प्रकृति प्रेम की अनूठी मिसाल: रातल्या गांव के ग्रामीणों ने ₹3 लाख की लागत से करवाया वट वृक्ष का संरक्षण

प्रकृति प्रेम की अनूठी मिसाल: रातल्या गांव के ग्रामीणों ने ₹3 लाख की लागत से करवाया वट वृक्ष का संरक्षण

| योगेश शर्मा

जयपुर/डिग्गी-मालपुरा। विकास और आधुनिकता के दौर में जहां एक ओर पेड़ों की कटाई चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं जयपुर के डिग्गी-मालपुरा रोड स्थित रातल्या गांव के ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकजुटता की एक प्रेरक मिसाल पेश की है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से मोक्षधाम परिसर में स्थित एक विशाल बरगद (वट वृक्ष) के चारों ओर करीब 3 लाख रुपये की लागत से पक्के चबूतरे का निर्माण शुरू करवाया है।

20 वर्ष पुराने वृक्ष को मिला नया जीवन

​स्थानीय निवासी और समाजसेवी दिनेश बागड़ा ने बताया कि इस पहल की जड़ें दो दशक पुरानी हैं। गांव के प्रकृति प्रेमी स्व. लक्ष्मीनारायण मेहता ने करीब 20 वर्ष पूर्व मोक्षधाम परिसर में इस वट वृक्ष का रोपण किया था। आज उनकी उसी विरासत को सहेजने के लिए गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर इसके संरक्षण का बीड़ा उठाया है।

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

जनसहयोग से बदल रही मोक्षधाम की सूरत

​ग्रामीणों का मानना है कि मोक्षधाम जैसे पवित्र स्थान पर विकास कार्य होना आवश्यक है। इस दिशा में पिछले कुछ समय से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं:

  • मंदिर निर्माण: बीते वर्ष परिसर में भुतेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कार्य संपन्न हुआ।
  • चबूतरा निर्माण: अब ₹3 लाख की लागत से बरगद के चारों ओर चबूतरा बनाया जा रहा है, जो न केवल पेड़ को मजबूती देगा बल्कि ग्रामीणों के बैठने और सामाजिक मेलजोल के लिए एक केंद्र का कार्य भी करेगा।
  • प्रेरणा: गांव के युवाओं ने लक्ष्मीनारायण मेहता के प्रकृति प्रेम से प्रेरित होकर इस कार्य को जन-अभियान का रूप दिया है।

लक्ष्मीनारायण मेहता: एक प्रकृति प्रेमी की विरासत

​दिनेश बागड़ा के अनुसार, लक्ष्मीनारायण मेहता एक समर्पित प्रकृति एवं पक्षी प्रेमी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में गांव की तलाई, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में छायादार और फलदार पौधे लगाए थे। आज उनकी मेहनत का परिणाम है कि मोक्षधाम परिसर हरा-भरा नजर आता है।

“मोक्षधाम जैसी पवित्र जगह पर विकास और प्रकृति का संगम होना जरूरी है। ग्रामीणों का यह सामूहिक प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है कि अपनी जड़ों और पेड़ों को कैसे सहेजा जाता है।” > — दिनेश बागड़ा, स्थानीय निवासी

 

प्रमुख बिंदु: एक नजर में

विवरण

जानकारी

स्थान

रातल्या गांव (डिग्गी-मालपुरा रोड), जयपुर

मुख्य कार्य

वट वृक्ष के चारों ओर चबूतरा निर्माण एवं संरक्षण

अनुमानित लागत

₹3 लाख (ग्रामीणों के सहयोग से)

प्रेरणा स्रोत

प्रकृति प्रेमी लक्ष्मीनारायण मेहता

उद्देश्य

पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक मेलजोल

 

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