जयपुर, 1 जुलाई 2026 / गौरव कोचर/राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के तहत प्रथम प्लेनरी सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य विषय ‘एआई बेस्ड गवर्नेंस फॉर ऑल’ (सभी के लिए एआई आधारित सुशासन) रहा। सत्र के दौरान देश के शीर्ष नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों ने प्रशासनिक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका, स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण पर विस्तृत चर्चा की।
1. स्थानीय भाषाओं में सुशासन: अनुवादक की निर्भरता होगी खत्म
केन्द्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए आमजन की भाषा में प्रशासन की उपलब्धता पर विशेष बल दिया।
- मातृभाषा में काम की सुविधा: उन्होंने कहा कि नागरिकों को शासन-प्रशासन से जुड़े कार्यों के लिए किसी अनुवादक पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। सभी कार्य उनकी मातृभाषा में ही सुलभ होने चाहिए।
- भाषिणी और सीपी ग्राम की भूमिका: ‘भाषिणी’ जैसे एआई आधारित प्लेटफॉर्म विभिन्न भाषाओं और बोलियों में अनुवाद की सुविधा देकर स्थानीय भाषा में प्रभावी सुशासन का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। इसके साथ ही, सीपी ग्राम जैसे ऐप न्यायिक कार्यवाहियों के स्थानीय भाषाओं में अनुवाद में सहायक सिद्ध हो रहे हैं, जिससे लोगों को अपनी भाषा में न्याय मिल पा रहा है।
- बेहतर डेटा गवर्नेंस: सरकारी विभागों के बड़े डेटा सेट्स को एआई की मदद से एकीकृत और व्यवस्थित किया जा रहा है, जिससे सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
2. वैश्विक पटल पर भारत: एआई महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में वैज्ञानिक-जी और एआई एवं इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की प्रमुख कविता भाटिया ने देश की तकनीकी क्षमता के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए भारत को एक वैश्विक लीडर के रूप में रेखांकित किया।
- मजबूत वर्कफोर्स और स्टार्टअप्स: भारत वर्तमान में 60 लाख एआई वर्कफोर्स और 2 लाख स्टार्टअप्स के साथ वैश्विक स्तर पर एआई महाशक्ति बनकर उभर रहा है।
- वैश्विक रैंकिंग: एआई वाइब्रेंसी (AI Vibrancy) के मामले में भारत आज विश्व में तीसरे स्थान पर है।
- जमीनी स्तर पर प्रयोग: देश की चुनौतियों के समाधान के लिए स्केलेबल और नागरिक-केंद्रित समाधान विकसित किए जा रहे हैं। कई राज्य सरकारें सड़कों के गड्ढों की पहचान करने, सड़क अवसंरचना की आवश्यकताओं को परखने और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने में एआई का व्यावहारिक उपयोग कर रही हैं।
3. समावेशी विकास और वंचित वर्गों का सशक्तीकरण
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि एआई केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम है।
- सबसे बड़ा ‘इक्वलाइजर’: गेट्स फाउंडेशन के डिप्टी डायरेक्टर (पॉलिसी, कम्युनिकेशंस एवं फिलैंथ्रॉपिक पार्टनरशिप्स) अर्नव कपूर ने कहा कि एआई दुनिया का सबसे बड़ा ‘इक्वलाइजर’ (समानता लाने वाला) साबित हो सकता है। इसके लिए एआई तक सार्वभौमिक पहुंच के साथ-साथ लोगों में विश्वास जगाना जरूरी है, ताकि वे धोखाधड़ी के डर से मुक्त होकर इसका उपयोग कर सकें।
- कमजोर वर्गों को लाभ: डेलॉइट के गवर्नमेंट एंड पब्लिक सर्विसेज कंसल्टिंग लीडर एन.एस.एन. मूर्ति ने बताया कि कैसे एआई के माध्यम से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को बड़े पैमाने पर सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने किसानों और दिव्यांगजनों को एआई आधारित समाधानों से मिल रहे व्यावहारिक लाभों के उदाहरण भी साझा किए।
4. फ्रंटियर टेक्नोलॉजी से 2047 तक ‘विकसित भारत’ का संकल्प
नीति आयोग के प्रोग्राम डायरेक्टर/एडवाइजर (ग्रीन ट्रांजिशन, क्लाइमेट एंड एनवायरनमेंट, आईटी एवं टेलीकॉम) प्रदीप सिंह ने नीति फ्रंटियर टेक हब की भूमिका पर प्रकाश डाला।
- पारदर्शी और दक्ष शासन: उन्होंने कहा कि नीति फ्रंटियर टेक हब की पहल भारत में एआई आधारित सुशासन को गति देने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
- नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण: इन आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग से भविष्य के शासन को अधिक पारदर्शी, गतिशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकेगा।