24 घंटे बाजार खोलने की योजना: सरकार स्टेकहोल्डर्स से करे विस्तृत मंथन – आरतिया

रिपोर्ट: योगेश शर्मा, जयपुर

जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश के 123 शहरों में मॉल, दुकानों और रेस्तरां सहित सभी बाजारों को 24 घंटे खोलने की महत्वाकांक्षी योजना पर व्यापारियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश भर के व्यापारियों से मिले इनपुट के बाद अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन (आरतिया) की हाई लेवल कमेटी की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरकार से मांग की गई कि इस फैसले को जमीन पर उतारने से पहले सभी संबंधित पक्षों और व्यापारिक संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।

​आरतिया की इस बैठक में प्रमुख उद्यमी और व्यापारी नेता विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, जसवंत मील, प्रेम बियाणी, दिनेश गुप्ता, कैलाश शर्मा सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार हो समाधान

​बैठक में विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि हर व्यापार की प्रकृति और कार्यप्रणाली अलग होती है। कपड़ा बाजार, जैम एंड ज्वैलरी, ग्रॉसरी, ऑटोमोबाइल और फल-सब्जी जैसे क्षेत्रों की अपनी चुनौतियां हैं। आरतिया का कहना है कि:

  • ​सरकार को अलग-अलग सेक्टर के व्यापारियों से संवाद कर उनकी व्यावहारिक दिक्कतों को समझना चाहिए।
  • ​रात्रि कालीन बाजार की सफलता पूरी तरह ‘ग्राहक मनोविज्ञान’ पर निर्भर करती है। बिना ग्राहक के बाजार का परिचालन संभव नहीं है, इसलिए ग्राहक समूहों से भी इनपुट लेना आवश्यक है।

सरकारी विभागों की तैयारियों पर सवाल

​टीम आरतिया ने जोर देकर कहा कि 24 घंटे व्यापार चलाने के लिए केवल दुकान खोलना काफी नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र का सहयोग अनिवार्य है। इसके लिए निम्नलिखित विभागों की 24×7 सक्रियता जरूरी होगी:

  1. सुरक्षा और कानून व्यवस्था: पुलिस की पुख्ता गश्त।
  2. बुनियादी सुविधाएं: नगर निगम द्वारा सफाई और बिजली की निरंतर आपूर्ति।
  3. परिवहन एवं स्वास्थ्य: रात के समय सुगम यातायात और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं।
  4. बैंकिंग और बीमा: वित्तीय लेनदेन और सुरक्षा कवर की उपलब्धता।

आर्थिक व्यवहार्यता और सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन

​व्यापारियों ने सबसे बड़ी चिंता ‘लागत और बिक्री’ (Cost vs Sale) के संतुलन को लेकर जताई है। यदि रात में परिचालन की लागत अधिक आती है और ग्राहकों की संख्या कम रहती है, तो यह योजना व्यापारियों के लिए बोझ बन जाएगी। इसके अलावा:

  • ​सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस फैसले से संगठित और असंगठित क्षेत्रों के बीच असंतुलन न बढ़े।
  • ​यह भी विश्लेषण जरूरी है कि कहीं इस छूट का लाभ असामाजिक गतिविधियों या विशेष क्षेत्रों को ही तो नहीं मिल रहा।

सुझाव: ‘पायलट प्रोजेक्ट’ से हो शुरुआत

​आरतिया ने सरकार को एक व्यवहारिक सुझाव देते हुए कहा कि इस योजना को सीधे 123 शहरों में लागू करने के बजाय, पहले किसी एक शहर में ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के तौर पर शुरू किया जाना चाहिए। वहां से प्राप्त परिणामों और अनुभवों के आधार पर इसे पूरे प्रदेश में अधिक प्रभावी और त्रुटिहीन ढंग से लागू किया जा सकता है।

उपस्थिति: बैठक में ओ पी राजपुरोहित, डॉ. रमेश मित्तल, मुकेश शाह, जितेंद्र अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश, अजय गुप्ता, राजीव सिंहल, तरूण सारडा, आयुष जैन आदि ने भी अपने विचार रखे और सरकार से इस दिशा में संवेदनशील कदम उठाने की अपील की।

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