1962-एमवीयू राजस्थान चैटबॉट को देशभर में मिली सराहना, अन्य राज्य भी अपनाएंगे मॉडल
जयपुर, 12 सितम्बर। नरेश गुनानी। टेलीग्राफ टाइम्स।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के निर्देशन में संचालित 1962-एमवीयू राजस्थान चैटबॉट को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है। 22 अप्रैल 2025 से शुरू हुई यह अभिनव सुविधा देश में पहली बार मोबाइल वैटेरीनरी यूनिट कॉल सेंटर के साथ जोड़ी गई।

8 सितम्बर को केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने आकस्मिक रूप से इस चैटबॉट से जुड़कर वीडियो कॉल द्वारा टेली कंसलटेंसी सेवा का अनुभव लिया। उन्होंने इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों में भी लागू करने योग्य बताया।
महाराष्ट्र सरकार भी अपनाएगी चैटबॉट मॉडल
इससे पूर्व 4 सितम्बर को महाराष्ट्र सरकार ने भी राजस्थान के इस मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया। कृषि, पशुपालन, डेयरी डेवलपमेंट एवं मत्स्य विभाग के उप सचिव एम.बी. माराले ने “1962 महापशुधन संजीवनी एप” के तहत राजस्थान की तर्ज पर व्हाट्सएप चैटबॉट सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए।
क्या है 1962 व्हाट्सएप चैटबॉट सुविधा
पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि पशुपालकों की सुविधा के लिए 1962-एमवीयू राजस्थान चैटबॉट की शुरुआत की गई है। इसका नंबर 9063475027 है। इसके माध्यम से:
- पशुपालक घर बैठे मोबाइल पर चैट करके पशु की बीमारी का इलाज जान सकते हैं।
- विभागीय योजनाओं और संस्थाओं की जानकारी मिलती है।
- गूगल मैप पर संस्थाओं की लोकेशन देखी जा सकती है।
- वीडियो कॉल द्वारा पशु चिकित्सक से टेलीकंसलटेंसी ली जा सकती है।
- प्रिस्क्रिप्शन भी सीधे व्हाट्सएप पर जारी किया जाता है।
अब तक 48 हजार पशुपालक लाभान्वित
यह चैटबॉट सप्ताह में सातों दिन सुबह 6 से शाम 6 बजे तक संचालित होता है। कॉल सेंटर पर सात पशु चिकित्सकों की टीम सेवाएं प्रदान करती है। अब तक 48 हजार से अधिक पशुपालक इस सेवा से लाभ उठा चुके हैं, जिनमें से 8600 से अधिक ने वीडियो टेलीकंसलटेंसी के माध्यम से विशेषज्ञ सलाह प्राप्त की है।
उल्लेखनीय है कि ‘‘1962-एमवीयू राजस्थान’’ चैटबॉट को बीएफआईएल, इंडसइंड बैंक और पशुपालन विभाग राजस्थान के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया है।