लॉसल सांगलिया: सामाजिक सौहार्द के प्रतीक करतार सिंह सांगलिया का देवलोकगमन

राजस्थान


लॉसल सांगलिया: सामाजिक सौहार्द के प्रतीक करतार सिंह सांगलिया का देवलोकगमन
श्रद्धांजलि सभा 11 जुलाई को सांगलिया धूणी में पीठाधीश्वर गुरुदेव ओमदास जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित होगी

Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 09,2025
लॉसल/सांगलिया — सामाजिक समरसता, गौ सेवा और धर्म साधना के प्रतीक करतार सिंह सांगलिया का हाल ही में देवलोकगमन हो गया। वे सांगलिया धूणी के परम भक्त और बाबा लकड़दास गौशाला के सेवक थे। उनके एकादशी (जागरण) कार्यक्रम का आयोजन 11 जुलाई 2025, शुक्रवार को श्रावण कृष्ण प्रतिपदा के पावन अवसर पर सांगलिया धूणी पीठाधीश्वर गुरुदेव ओमदास जी महाराज के सान्निध्य में किया जाएगा।

सांगलिया ग्रामवासियों सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित जागरण में क्षेत्र के संत-महात्मा, समाजसेवी, श्रद्धालुजन व गौभक्त बड़ी संख्या में सम्मिलित होंगे।

Photo credit Telegraph Times

गौसेवा को बना लिया जीवन का ध्येय

करतार सिंह सांगलिया का जीवन गौ माता की सेवा और सनातन मूल्यों की स्थापना को समर्पित रहा। कमल सिंह सांगलिया ने जानकारी देते हुए बताया कि वे न केवल सांगलिया धूणी के सेवक थे, बल्कि उन्होंने गांव-गांव में गौ ग्रास महा प्रसादी महोत्सव के आयोजन की प्रेरणा दी, जो अब जन आंदोलन बन चुका है।

उनकी प्रेरणा से हर गांव, हर गली में गौभक्ति और प्रसादी वितरण का आयोजन एक परंपरा बन गया है। यह अभियान आज प्रदेशभर में सामाजिक समरसता, धार्मिक एकता और सेवा भाव का संदेश दे रहा है।

सामाजिक सौहार्द के ध्वजवाहक

करतार सिंह सांगलिया न केवल धार्मिक सेवा में अग्रणी थे, बल्कि सामाजिक समरसता और सद्भावना के प्रतीक भी थे। गांव में उनके प्रभाव से अनेक जाति-पंथ के लोगों में भाईचारा मजबूत हुआ। वे हमेशा “सभी जीवों में एक आत्मा का दर्शन” का संदेश देते रहे।

गौमाता की शक्ति को जग में प्रचारित किया

उन्होंने अपने जीवन को गौमाता की शक्ति और भक्ति को जन-जन तक पहुंचाने में समर्पित कर दिया। अपने प्रवचनों और सेवा कार्यों के माध्यम से उन्होंने “गौसेवा ही नारायण सेवा है” का भाव लोगों के हृदय में रोपित किया।

गांव में शोक, श्रद्धांजलि का दौर

उनके देवलोकगमन के बाद गांव में मातम छाया हुआ है। श्रद्धालु, सेवक, ग्रामीणजन उनके आवास व सांगलिया धूणी पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

गुरुदेव ओमदास जी महाराज ने उन्हें “गौ सेवा के अमिट यज्ञ का समर्पित यज्ञकुंड” बताते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहेगा।


🕯️ “गौमाता की सेवा में रत यह जीवन, अब अमर हो गया” — संगलिया धूणी


 

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