कोरबा: श्रमिक अधिकारों पर चोट के खिलाफ कोयला कर्मियों की हड़ताल आज, श्रमिकों ने कहा- ये लड़ाई अगली पीढ़ी की आज़ादी की है

छत्तीसगढ़


कोरबा: श्रमिक अधिकारों पर चोट के खिलाफ कोयला कर्मियों की हड़ताल आज, श्रमिकों ने कहा- ये लड़ाई अगली पीढ़ी की आज़ादी की है

कोरबा (छत्तीसगढ़), 9 जुलाई:
देशभर में आज 9 जुलाई को केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आयोजन किया गया है। कोरबा में कोयला क्षेत्र से जुड़े हजारों श्रमिकों ने भी इस हड़ताल में भागीदारी की है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह हड़ताल नए लेबर कोड के विरोध में है, जिसे श्रमिक विरोधी और “काला कानून” करार दिया गया है।

Photo credit Telegraph Times

क्या है विवाद का कारण?
INTUC से संबद्ध SEKMC के प्रेसिडेंट गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा पारित किए गए चार नए लेबर कोड के ज़रिए 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म किया गया है। नए कानूनों में मजदूरों के हड़ताल के अधिकार, यूनियन बनाने की स्वतंत्रता और कार्यस्थल की सुरक्षा जैसी मूल सुविधाओं को कमजोर कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि –

“सरकार मालिक नहीं, कंपनी की कस्टोडियन है। लेकिन मौजूदा नीति उसे बेचने और प्राइवेट हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है।”

प्रमुख आपत्तियाँ:

  • हड़ताल के अधिकार में कटौती: मजदूर अब बिना सरकारी अनुमति के हड़ताल नहीं कर सकेंगे।
  • ठेका प्रथा को बढ़ावा: रेगुलर भर्ती की बजाय अग्निवीर जैसे चार साल के टर्म एम्प्लॉयमेंट की नीति लाई जा रही है।
  • यूनियन गठन पर अंकुश: यूनियन बनाने के लिए पहले प्रबंधन से सहमति लेनी होगी और वही यूनियन मान्य होगी जिसके पास 51% समर्थन हो – जिसमें ठेका श्रमिकों को जोड़कर आंकड़े तोड़े-मरोड़े जा सकते हैं।
  • छंटनी की खुली छूट: 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों को छंटनी की मंजूरी के लिए सरकार की अनुमति की ज़रूरत नहीं होगी।
  • महिलाओं से तीनों शिफ्ट में काम: महिलाओं को दिन-रात किसी भी समय काम करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।

कोरबा में व्यापक समर्थन
कोरबा में कोल इंडिया से जुड़ी कई इकाइयों के श्रमिकों ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है। यूनियनों का कहना है कि यह लड़ाई केवल मौजूदा श्रमिकों की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की आज़ादी और अधिकारों की रक्षा के लिए है।

गोपाल नारायण सिंह का आह्वान
गोपाल नारायण सिंह ने कोरबा के सभी कोयला श्रमिकों से अपील की कि वे इस हड़ताल को सफल बनाकर अपने अधिकारों की रक्षा करें।

“हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से लड़कर अधिकार पाए थे। क्या अब हम अपने बच्चों को कॉर्पोरेट गुलामी सौंप देंगे?” – उन्होंने कहा।


 

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