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योगिनी एकादशी विशेष रिपोर्ट: तीर्थ स्नान व दान से मिलेगा अक्षय पुण्य, निंबार्क संप्रदाय में रविवार को व्रत
Edited By : सुनील शर्मा
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 20,2025
पुष्कर/अजमेर | संवाददाता – हरिप्रसाद शर्मा
इस बार योगिनी एकादशी का विशेष संयोग 21 जून शनिवार और 22 जून रविवार को बन रहा है। पंचांग गणना के अनुसार यह एकादशी तिथि शनिवार 21 जून को प्रातः 7:19 बजे से प्रारंभ होगी। परंतु यह तिथि “क्षय” होकर रविवार 22 जून को निंबार्क संप्रदाय के अनुसार मान्य रहेगी।
समर्थ और वैष्णव संप्रदाय के लिए शनिवार, निंबार्क संप्रदाय के लिए रविवार व्रत
पंचांगों जैसे श्री निर्णय सागर, विश्व विजय पंचांग, श्रीधरी पंचांग, श्री वल्लभ मनीराम पंचांग, श्री राज प्रचार पंचांग एवं श्री गजेंद्र विजय पंचांग में यह विवरण स्पष्ट किया गया है कि समर्थ और वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी शनिवार को व्रत रखेंगे, जबकि निंबार्क संप्रदाय के अनुयायी रविवार 22 जून को योगिनी एकादशी का व्रत करेंगे।
पुष्कर तीर्थ में स्नान का विशेष महत्व
पंडित कैलाश ना दाधीच के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन पुष्कर जैसे दिव्य तीर्थ में स्नान, हवन, पूजन, दान-पुण्य करना विशेष फलदायक माना गया है। इस दिन किया गया पुण्य करोड़ों गुना फल देता है और स्वयं नारायण एवं लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दान का महत्व और शुभ फल
इस दिन जल, अन्न, फल, ठंडे पदार्थ, दूध-मावा आदि का दान करने से अक्षय फल प्राप्त होते हैं। खासकर पितरों के नाम से किया गया तर्पण, मार्जन और पिंडदान उन्हें नारायण के चरणों में मोक्ष प्रदान करता है और परिवार को आशीर्वाद मिलता है।
योगिनी का तात्त्विक महत्व
योगिनी स्वयं शक्ति का रूप मानी जाती है, जो नारायण के साथ रहकर जनमानस को सुख, शांति, समृद्धि और कृपा प्रदान करती है। इस दिन नारायण मंत्र जाप, श्रीमद्भागवत स्मरण और गीता पाठ विशेष फलदायी माने गए हैं।
👉 इस योगिनी एकादशी पर श्रद्धालु स्नान, ध्यान, जप व दान से अपने जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें। पुष्कर जैसे पुण्य तीर्थ में डुबकी लगाने का महत्व इस अवसर पर और भी अधिक हो जाता है।