12 प्रतिशत की विकास दर को ‘राष्ट्रीय मिशन’ बनाने का समय: विकसित भारत के लिए क्रांतिकारी सुझाव
| योगेश शर्मा
नई दिल्ली/जयपुर। भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में वैश्विक चुनौतियों और टैरिफ बाधाओं के बावजूद लगभग 8 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब हमें 12 प्रतिशत की विकास दर को एक ‘राष्ट्रीय मिशन’ के रूप में स्वीकार करना चाहिए। देश को शीघ्र ही 5 ट्रिलियन डॉलर और भविष्य में 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए दो अंकों की यह विकास दर अनिवार्य है।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आंतरिक सुधार, ग्रामीण विकास और ढांचागत बदलावों पर केंद्रित एक व्यापक रोडमैप प्रस्तावित किया गया है।
1. सार्वजनिक परिवहन: तेल आयात में 30% कमी का लक्ष्य
पेट्रोलियम आयात अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव डालता है। इसे कम करने के लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं:
- कर मुक्त परिवहन: सार्वजनिक परिवहन को पूर्ण रूप से कर मुक्त किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर अनुदान (Subsidy) भी दिया जाए।
- रेलवे का विस्तार: युद्ध स्तर पर हजारों नई ईएमयू (EMU) ट्रेनें चलाई जाएं ताकि आम जनता के समय की बचत हो और उत्पादकता बढ़े।
- लाभ: एक मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से तेल आयात में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आएगी, विदेशी मुद्रा बचेगी और शहरों में प्रदूषण कम होगा।
2. शोध और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकेंद्रीकरण
विकास को ‘आदत’ बनाने के लिए शोध (R&D) को प्राथमिकता देना जरूरी है:
- रिसर्च फंड: नवाचार को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च फंड में भारी बढ़ोतरी की जाए। हर शैक्षणिक संस्थान में शोध विभाग स्थापित हों।
- ग्रामीण विश्वविद्यालय: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए विशेष ‘ग्रामीण विकास शोध संस्थान’ और विश्वविद्यालय बनाए जाएं। स्थानीय अर्थव्यवस्था (Local Economy) को बढ़ाकर ही 10 ट्रिलियन डॉलर का सपना सच होगा।
3. स्वर्ण नीति और तस्करी पर लगाम
सोने के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए रणनीति में बदलाव की आवश्यकता है:
- देश में सोने का उत्पादन बढ़ाना और आभूषण निर्यात की क्षमता को कई गुना विकसित करना।
- आम जनता को वैध तरीके से सोना लाने की सीमा बढ़ानी चाहिए। इससे तस्करी पर लगाम लगेगी और सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त होगा।
4. सामाजिक सुरक्षा और स्वरोजगार
युवाओं को केवल सरकारी नौकरी के भरोसे बैठने के बजाय स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना अनिवार्य है:
- निजी क्षेत्र के कर्मचारियों और श्रमिकों को सरकारी कर्मचारियों के समान सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा सुविधा मिले।
- जब युवाओं को भविष्य की सुरक्षा का अहसास होगा, तो वे अपने कौशल और प्रतिभा का उपयोग निजी क्षेत्र व स्टार्टअप्स में अधिक आत्मविश्वास के साथ कर सकेंगे।
5. बचत प्रोत्साहन और कर सुधार
अर्थव्यवस्था को कर्ज मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए बचत की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा:
- आयकर में छूट: कर मुक्त वार्षिक बचत की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये की जानी चाहिए।
- मध्यम वर्ग को राहत: आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर 15 लाख रुपये वार्षिक तक ले जाने का सुझाव है, जिससे मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ेगी।
- सामाजिक सुरक्षा फंड: सरकार एक विशेष फंड बनाए जिसमें योगदान करने वालों को आयकर से पूरी तरह मुक्ति मिले।
6. रक्षा बजट और रणनीतिक शक्ति
देश की सुरक्षा और मनोबल बढ़ाने के लिए रक्षा बजट में क्रांतिकारी बदलाव की जरूरत है:
- रक्षा बजट को कुल जीडीपी का 3 से 4 प्रतिशत किया जाए।
- कुल रक्षा बजट का 20 प्रतिशत हिस्सा केवल अनुसंधान (R&D) पर खर्च हो, विशेषकर लड़ाकू विमान के इंजन और पनडुब्बी निर्माण जैसे क्षेत्रों में।
7. पर्यावरण अनुकूल मौलिक विकास प्रणाली
भारत की विविधता को देखते हुए एक ऐसी विकास प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है जो पर्यावरण और समाज के अनुकूल हो। राज्यों और क्षेत्रों के अनुसार ‘स्टेनेबल डेवलपमेंट’ के लिए अलग शोध विभाग होना चाहिए, जो दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल पेश कर सके।

