गौरव कोचर/देश में करेंसी के इस्तेमाल को और अधिक सुलभ, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद, आरबीआई जल्द ही 10 रुपये और 20 रुपये के प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों का फील्ड ट्रायल शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए प्राथमिक चरण में 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापने की योजना बनाई गई है।
अगर यह ट्रायल सफल रहता है, तो देश की बैंकिंग व्यवस्था और आम जनता की जेब में दिखने वाली करेंसी में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा।
क्या है योजना और कैसे होगा ट्रायल?
आरबीआई शुरुआत में इसे पूरे देश में एक साथ जारी करने के बजाय देश के चुनिंदा 5 शहरों में फील्ड ट्रायल के तौर पर उतारेगा।
- शहरों का चयन: ये ट्रायल अलग-अलग भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों (जैसे अत्यधिक गर्मी, नमी और सर्दी) वाले शहरों में किए जाएंगे ताकि नोटों की सहनशीलता का सही आंकलन किया जा सके।
- नोटों की मात्रा: 10 और 20 रुपये के कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापने की मंजूरी मिली है।
कागजी नोटों का क्या होगा?
इस खबर के बाद आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा 10 और 20 रुपये के कागजी नोट बंद हो जाएंगे?
स्पष्ट उत्तर: नहीं, आपके पास रखे 10 और 20 रुपये के पुराने कागजी नोट पूरी तरह से वैध (Legal Tender) रहेंगे।
- धीरे-धीरे बदलाव: आरबीआई पुरानी कागजी करेंसी को अचानक बंद नहीं करेगा। कागजी नोट बाजार में चलते रहेंगे और जैसे-जैसे वे खराब या फटे-पुराने होकर बैंकों में वापस आएंगे, उन्हें हटाकर नए प्लास्टिक नोट सर्कुलेशन में डाले जाएंगे।
- कोई नोटबंदी नहीं: यह केवल एक तकनीकी सुधार और ट्रायल है, इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों के फायदे
कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोटों के कई बड़े फायदे हैं, जिसके चलते आरबीआई यह बड़ा कदम उठा रहा है:
- लंबी उम्र (Durability): 10 और 20 रुपये के छोटे नोट बहुत तेजी से हाथों-हाथ बदलते हैं, जिससे कागजी नोट जल्दी फट जाते हैं या गल जाते हैं। प्लास्टिक नोटों की लाइफ कागजी नोटों की तुलना में 3 से 5 गुना अधिक होती है।
- पानी और गंदगी से बचाव: पॉलीमर नोट वाटरप्रूफ होते हैं। ये पानी में भीगने से गलते नहीं हैं और इन पर मैल या गंदगी आसानी से नहीं चिपकती।
- छपाई के खर्च में कमी: हालांकि पॉलीमर नोटों की शुरुआती छपाई लागत कागजी नोटों से थोड़ी अधिक होती है, लेकिन इनकी लंबी उम्र के कारण बार-बार नए नोट छापने का खर्च काफी घट जाएगा।
- नकली नोटों पर लगाम: पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स (Security Features) शामिल करना बेहद आसान होता है, जिससे इनकी नकल करना लगभग असंभव हो जाता है।
दुनिया भर में पॉलीमर नोटों का चलन
वर्तमान में दुनिया के 60 से अधिक देशों में पॉलीमर यानी प्लास्टिक बैंक नोट्स का सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहा है।
- ऑस्ट्रेलिया 1988 में पूरे तरीके से पॉलीमर नोट अपनाने वाला दुनिया का पहला देश बना था।
- इसके अलावा ब्रिटेन (यूके), कनाडा, न्यूजीलैंड, वियतनाम, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी प्लास्टिक के नोट बड़े पैमाने पर चलन में हैं।
10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों की शुरुआत भारत में कैश हैंडलिंग को एक नया आयाम देगी। फटे-पुराने और गले हुए नोटों की समस्या से आम जनता को मुक्ति मिलेगी और आरबीआई का छपाई बजट भी संतुलित होगा। फिलहाल सभी की नजरें आरबीआई के इस बहुप्रतीक्षित फील्ड ट्रायल पर टिकी हैं।