- प्रदेश के 41 जिलों की 424 तहसीलों और 50,456 राजस्व ग्रामों में आयोजित होगा सर्वे
- पहली बार लागू होगी Artificial Intelligence (AI) आधारित गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली
- 4.62 करोड़ से अधिक खसरों में से 2.86 करोड़ कृषि योग्य खसरों की जिओ-फेंसिंग के साथ होगी डिजिटल गिरदावरी
- 25 प्रतिशत खसरों की गिरदावरी स्वयं किसान करेंगे, राजकिसान गिरदावरी ऐप से मिलेगी सुविधा
जयपुर, 31 जुलाई/ प्रीति बालानी/राजस्थान सरकार कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 1 अगस्त 2026 से प्रदेशभर में खरीफ 2083 (वर्ष 2026-27) डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) प्रारंभ करने जा रही है। यह महत्वाकांक्षी सर्वे राज्य के 41 जिलों की 424 ऑनलाइन तहसीलों एवं 50,456 ऑनलाइन राजस्व ग्रामों में आयोजित किया जाएगा।
शुक्रवार को निबंधक, राजस्व मंडल महावीर प्रसाद की अध्यक्षीय उपस्थिति में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए एग्रीस्टेक-डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत फसल खरीफ संवत 2083 की गिरदावरी से संबंधित आवश्यक प्रशिक्षण और दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। इस दौरान सभी जिलों के प्रभारी अधिकारी (भू-अभिलेख), समस्त तहसीलदार (भू.अ.), डीसीएस के तकनीकी अधिकारी, कृषि आयुक्तालय के अधिकारी, रिसोर्स पर्सन और मास्टर्स ट्रेनर्स उपस्थित रहे।
बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे में हर स्तर से अधिकाधिक किसानों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे ऑनलाइन गिरदावरी कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करें और फील्ड विजिट कर किसानों को इस व्यवस्था के लाभों के प्रति जागरूक करें।
4.62 करोड़ से अधिक खसरों का होगा सर्वे
डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत प्रदेश के कुल 4.62 करोड़ से अधिक ऑनलाइन खसरों की नियमानुसार गिरदावरी की जाएगी:
- कृषि योग्य खसरे: लगभग 2.86 करोड़ कृषि योग्य खसरों को डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें 20 मीटर खसरा सीमा (Geo-fencing) के भीतर Geo-tagged फसल फोटो एवं डिजिटल सत्यापन के साथ गिरदावरी होगी।
- सामान्य ई-गिरदावरी: शेष खसरों (मुख्यतः सरकारी भूमि, गैर-कृषि भूमि एवं पड़त भूमि) की सामान्य ई-गिरदावरी की जाएगी।
- डिजिटल माध्यम: पटवारी एवं प्राइवेट सर्वेयर ‘राज खसरा गिरदावरी’ मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन गिरदावरी करेंगे।
किसानों की होगी 25% प्रत्यक्ष भागीदारी
इस वर्ष डिजिटल क्रॉप सर्वे में किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार ने लक्षित खसरों में से 25 प्रतिशत खसरों की गिरदावरी स्वयं किसानों द्वारा किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे आंकड़ों की प्रामाणिकता बढ़ेगी और किसानों का सशक्तिकरण होगा। किसान अपने स्मार्टफोन पर ‘राजकिसान गिरदावरी ऐप’ डाउनलोड कर खुद गिरदावरी कर सकेंगे।
AI और सेन्ट्रॉइड डिटेक्शन जैसी आधुनिक तकनीकें
इस बार सर्वे में सटीकता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उच्च स्तरीय तकनीकों का समावेश किया गया है:
- AI आधारित गुणवत्ता परीक्षण: खरीफ 2083 में पहली बार Artificial Intelligence प्रणाली लागू की जा रही है। अपलोड किए गए फसल फोटोग्राफ और विवरण का AI के माध्यम से स्वतः विश्लेषण होगा, जो संभावित त्रुटियों या अनुपयुक्त फोटो की त्वरित पहचान करेगा।
- सेन्ट्रॉइड डिटेक्शन (Centroid Detection): इस तकनीक से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सर्वेयर या पटवारी वास्तविक खसरा क्षेत्र में उपस्थित होकर सही एंगल से फसल की फोटो ले रहे हैं।
कृषि नीतियों और योजनाओं का बनेगा मुख्य आधार
डिजिटल क्रॉप सर्वे से प्राप्त प्रामाणिक आंकड़े राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे:
- फसल उत्पादन का सटीक आकलन और कृषि सांख्यिकी का सुदृढ़ीकरण।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्राकृतिक आपदा राहत का प्रभावी और त्वरित क्रियान्वयन।
- किसान कल्याणकारी नीतियों का सटीक नियोजन।
राजस्व विभाग द्वारा प्रदेश भर में इस सर्वेक्षण के सफल संचालन हेतु हेल्पडेस्क, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण एवं निरंतर मॉनिटरिंग की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है।