खैरथल-तिजारा/किशनगढ़बास / नरेश गुनानी /खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़बास थाना क्षेत्र में पापड़ी टोल टैक्स के समीप एक होटल के पीछे बनी झोपड़ी में भारी मात्रा में मांस मिलने से हड़कंप मच गया। डीप फ्रीजर में छुपाकर रखे गए इस मांस के गोमांस होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस और गोरक्षक टीमों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। पुलिस ने पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में मांस के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला (FSL) भेज दिए हैं, जबकि शेष मांस को बासड़ा गांव में जमीन में दफना दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई और गुपचुप तरीके से मांस दफनाने को लेकर ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
डीप फ्रीजर में मिला भारी मात्रा में मांस, गोरक्षक टीमों की सूचना पर पहुंची पुलिस
जानकारी के अनुसार, पापड़ी टोल टैक्स के पास स्थित एक होटल के पीछे बनी झोपड़ी में संदिग्ध गतिविधि और मांस रखे होने की इनपुट अलवर और किशनगढ़बास की गोरक्षक टीमों को मिली थी। गोरक्षकों की सूचना पर किशनगढ़बास थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और मौके पर दबिश दी। झोपड़ी की सघन तलाशी लेने पर वहां रखे एक बड़े डीप फ्रीजर में भारी मात्रा में मांस बरामद हुआ।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत पशु चिकित्सकों की टीम को मौके पर बुलाया। डॉक्टरों की मौजूदगी में मांस के सैंपल लिए गए, ताकि वैज्ञानिक जांच से यह स्पष्ट हो सके कि मांस किस पशु का है।
मामले में FIR दर्ज, होटल संचालक से पूछताछ शुरू
किशनगढ़बास डीएसपी लालसिंह यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना पर त्वरित कार्रवाई की गई है। पशु चिकित्सक से सैंपल दिलवाकर जांच के लिए भिजवा दिए गए हैं। पुलिस ने इस संबंध में संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। होटल संचालक और झोपड़ी से जुड़े संदिग्ध लोगों को चिह्नित कर उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। डीएसपी ने स्पष्ट किया कि यदि प्रयोगशाला की रिपोर्ट में गोमांस होने की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ राजस्थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और प्रस्थापन का विनियमन) अधिनियम के तहत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बासड़ा गांव में मांस दफनाने से फैला भ्रम, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
पुलिस और प्रशासन द्वारा बरामद मांस को नष्ट करने के लिए बासड़ा गांव की सीमा में ले जाकर जमीन में दफनाने की प्रक्रिया अपनाई गई। लेकिन इस कार्रवाई के तरीके ने ग्रामीणों के बीच भारी भ्रम और अफवाहों को जन्म दे दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक, अचानक एक जेसीबी मशीन और कुछ लोग बड़ा डीप फ्रीजर लेकर गांव पहुंचे। उन्होंने आनन-फानन में करीब 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा और फ्रीजर में रखी सामग्री को उसमें दबाकर चले गए। उस वक्त स्थानीय ग्रामीणों को इस आधिकारिक कार्रवाई की भनक तक नहीं थी। अचानक हुई इस हलचल से गांव में तरह-तरह की आशंकाएं और सनसनी फैल गई। बाद में जब पुलिस की इस कार्रवाई का खुलासा हुआ, तब जाकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
ग्रामीणों की मांग: आधिकारिक कार्रवाई की मिले पूर्व सूचना
इस पूरे घटनाक्रम पर बासड़ा के ग्रामीणों ने प्रशासन के कार्य तरीके पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई भी सरकारी विभाग इस तरह की संवेदनशील या निस्तारण संबंधी कार्रवाई किसी ग्रामीण क्षेत्र में करता है, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों या ग्रामीणों को इसकी पूर्व सूचना या सार्वजनिक जानकारी दी जानी चाहिए। बिना बताए इस तरह की गुपचुप कार्रवाइयों से इलाके में अनावश्यक भय, भ्रम और सांप्रदायिक या सामाजिक अफवाहें फैलने का खतरा बना रहता है। फिलहाल, पूरे इलाके में शांति है लेकिन हर किसी को अब प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।