जयपुर/ योगेश शर्मा/पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग की ओर से ‘रीसेंट एडवांसेज इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (Recent Advances in Artificial Intelligence) विषय पर दो दिवसीय स्कोपस इंडेक्स्ड इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन में देश और दुनिया के रिसर्चर्स, एकेडेमिक्स और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स ने एआई (AI) के लेटेस्ट एडवांसमेंट, भावी चुनौतियों और नए इनोवेशंस पर विस्तार से चर्चा की।
ग्लोबल दिग्गजों ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
सेंडिन (Sendin), नई दिल्ली के टैलेंट एक्विजिशन डायरेक्टर राजीव कुमार उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि रहे। वहीं, कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों (Guests of Honor) के रूप में देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें शामिल हैं:
- डॉ. अंशुमान शास्त्री (डायरेक्टर, सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बनस्थली विद्यापीठ)
- अनुभा फोफलिया (को-फाउंडर, लेंडफाउंड्री सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन)
- सपना वर्मा (पीपल एंड कल्चर लीड, कोपाडो)
- डॉ. रिची नायक (प्रोफेसर, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, ऑस्ट्रेलिया)
- डॉ. नमिता मित्तल (एमएनआईटी, जयपुर)
कॉन्फ्रेंस के संयोजक व एडिटर डॉ. अजय खुंटेटा ने बताया कि इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य एआई के क्षेत्र में हो रहे नए बदलावों को लेकर एक मजबूत मंच प्रदान करना था। उन्होंने जानकारी दी कि कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किए गए सभी 45 रिसर्च पेपर्स को प्रतिष्ठित ‘स्कोपस इंडेक्स्ड’ (Scopus Indexed) में प्रकाशित किया जाएगा। इसके अलावा, स्प्रिंगर बुक सीरीज ‘लेक्चर नोट्स इन नेटवर्क्स एंड सिस्टम्स’ की सहभागिता ने इस कॉन्फ्रेंस की एकेडमिक विश्वसनीयता को और अधिक मजबूत किया है।
मशीनी ऑटोमेशन बनाम इंसानी समझ: मुख्य अतिथि के विचार
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राजीव कुमार ने विभिन्न केस स्टडीज और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तुलना एक्चुअल इंटेलिजेंस (इंसानी बुद्धि) से की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि:
”टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ कामों को ऑटोमेट (स्वचालित) करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। एआई को इंसानी समझ, क्रिएटिविटी, सहानुभूति और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के पूरक (Complement) के रूप में काम करना चाहिए, न कि उसके विकल्प के रूप में।”
हेल्थकेयर, गवर्नेंस और करियर के नए अवसरों पर मंथन
कॉन्फ्रेंस के विभिन्न सत्रों में विषय विशेषज्ञों ने एआई के व्यावहारिक और सामाजिक पहलुओं पर अपने विचार रखे:
- सामाजिक विकास में एआई (डॉ. अंशुमान शास्त्री): उन्होंने बताया कि किस प्रकार हेल्थकेयर, एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी (पर्यावरणीय स्थिरता), गवर्नेंस और पब्लिक सर्विस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एआई का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने शोधकर्ताओं से समाजोपयोगी एआई आधारित समाधान विकसित करने का आग्रह किया।
- इंडस्ट्रियल उपयोग और उत्पादकता (सपना वर्मा): उन्होंने कॉरपोरेट जगत में एफिशिएंसी, डिसीजन-मेकिंग और कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने में एआई की भूमिका को रेखांकित किया, जहां उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का सफल प्रयोग हो रहा है।
- प्रोडक्ट डेवलपमेंट में तेजी (अनुभा फोफलिया): अपने कीनोट एड्रेस में उन्होंने बताया कि एआई किस प्रकार उत्पादों के डिजाइन, टेस्टिंग और डिप्लॉयमेंट (तैनाती) की प्रक्रिया को गति दे रहा है और इनोवेशन को बढ़ावा दे रहा है।
- ग्लोबल करियर और नए रास्ते (डॉ. रिची नायक): ऑस्ट्रेलिया से आईं डॉ. नायक ने वैश्विक स्तर पर एआई स्किल्ड प्रोफेशनल्स की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और इंटेलिजेंट सिस्टम जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए बेहतरीन करियर पाथवे उभर रहे हैं।
- असल दुनिया की चुनौतियां (डॉ. नमिता मित्तल): उन्होंने युवा रिसर्चर्स को प्रेरित करते हुए कहा कि वे किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर असल दुनिया की व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने के लिए नए एआई-ड्रिवन समाधान खोजें।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. कृति शर्मा द्वारा सभी अतिथियों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।