नई दिल्ली/ नरेश गुनानी/बदलती जीवनशैली, खान-पान की अस्वास्थ्यकर आदतों और स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता के बीच हृदय रोग वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि हृदय रोगों से बचाव केवल अस्पताल और दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत घर की रसोई, दैनिक आदतों और समग्र सामाजिक सहयोग से होती है।
एम्स, नई दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष तथा वर्तमान में मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एवं रिसर्च के प्रमुख डॉ. विनय कुमार बहल के अनुसार, हृदय रोगों का बड़ा हिस्सा समय रहते जोखिम कारकों की पहचान और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर रोका जा सकता है।
’प्राकृतिक’ का मतलब पूरी तरह सुरक्षित नहीं
बाजार में उपलब्ध आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों के अंधाधुंध उपयोग पर आगाह करते हुए डॉ. बहल ने स्पष्ट किया कि केवल ‘नेचुरल’ या ‘प्राकृतिक’ होने का यह अर्थ नहीं है कि उत्पाद हर स्थिति में हानिरहित है।
- दवाओं का टकराव: यदि कोई व्यक्ति पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) या मधुमेह (डायबिटीज) की दवाएं ले रहा है, तो बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी हर्बल या पूरक उत्पाद का सेवन घातक हो सकता है।
- उपचार में निरंतरता जरूरी: प्रमाण-आधारित आधुनिक चिकित्सा (एविडेंस-बेस्ड एलोपैथी) को बिना डॉक्टर की अनुमति के अचानक छोड़ना या किसी वैकल्पिक नुस्खे पर निर्भर होना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
घर और परिवार से बनेगी सुरक्षा की ढाल
हृदय को स्वस्थ रखने का अभियान घर से ही संभव है। जब पूरा परिवार मिलकर स्वस्थ दिनचर्या अपनाता है, तो जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है:
- आहार में सुधार: भोजन में नमक, चीनी और संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) की मात्रा सीमित कर संतुलित आहार अपनाना।
- सक्रिय बचपन: बच्चों को गैजेट्स और स्क्रीन से दूर रखकर खेलकूद और मैदानी गतिविधियों के लिए प्रेरित करना।
- वरिष्ठों की नियमित जांच: बुजुर्गों के रक्तचाप और ब्लड शुगर की समय-समय पर निगरानी।
- तंबाकू-मुक्त माहौल: घर को पूरी तरह धूम्रपान और तंबाकू से मुक्त रखना।
- पारिवारिक इतिहास की जानकारी: यदि परिवार में किसी को कम उम्र में दिल का दौरा, उच्च रक्तचाप या मधुमेह रहा हो, तो इसकी जानकारी चिकित्सक को अवश्य दें ताकि व्यक्तिगत जोखिम का सटीक आकलन हो सके।
रोकथाम: बहु-स्तरीय रणनीति की दरकार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, व्यवहारिक और पर्यावरणीय जोखिमों को नियंत्रित कर कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के एक बड़े हिस्से की रोकथाम संभव है। इसके लिए केवल व्यक्तिगत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं:
- व्यक्तिगत स्तर: नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और तंबाकू का त्याग।
- संस्थागत स्तर: स्कूलों और दफ्तरों में शारीरिक गतिविधियों के अनुकूल माहौल तैयार करना।
- सार्वजनिक ढांचा: स्वच्छ हवा, खुले पार्क, सुरक्षित पैदल मार्ग, स्वस्थ भोजन की आसान उपलब्धता और त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं।
एआई और जीनोमिक्स: हृदय चिकित्सा का भविष्य
कार्डियोलॉजी का क्षेत्र तेजी से आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रहा है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जीनोमिक्स: जीनोमिक्स, हाई-एंड इमेजिंग, वियरेबल डिवाइसेज (स्मार्टवॉच आदि) और एआई आधारित डेटा विश्लेषण से भविष्य में प्रत्येक मरीज की जरूरत के हिसाब से सटीक उपचार (पर्सनलाइज्ड मेडिसिन) संभव होगा।
- जन्मजात हृदय रोग पर फोकस: विश्व हृदय महासंघ की रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि हृदय स्वास्थ्य सिर्फ उम्रदराज लोगों या जीवनशैली जनित रोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि जन्मजात हृदय विकारों (कंजेनिटल हार्ट डिजीज) के समय पर निदान और उपचार पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
- समान पहुंच अनिवार्य: आधुनिक तकनीक का लाभ तभी सार्थक है जब यह समाज के हर वर्ग और अंतिम व्यक्ति तक रियायती दर पर पहुंचे।
बीमारी का इंतजार नहीं, आज से ही करें शुरुआत
विश्व हृदय दिवस या स्वास्थ्य जागरूकता दिवस केवल एक दिन की औपचारिकता नहीं हैं। हृदय की निरंतर धड़कन यह संदेश देती है कि स्वास्थ्य रक्षा भी एक अनवरत यात्रा है।
बीमारी की चपेट में आने के बाद उपचार कराने से कहीं बेहतर है कि बीमारी को पनपने ही न दिया जाए। नियमित जांच, सक्रिय दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली अपनाकर ही हम अपने दिल को लंबी और स्वस्थ उम्र दे सकते हैं।