योगेश शर्मा
जयपुर। राजस्थान सहित पूरे देश में पैर पसार रही भीषण गर्मी और लू (हीट वेव) की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए जयपुर के पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय ‘हीट वेव प्रिपेयर्डनेस एंड मिटिगेशन’ (लू के प्रति तैयारी और शमन) रहा।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। साथ ही, इसका आयोजन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर, महिला हाउसिंग ट्रस्ट (MHT), साउथ एशियन मेट्रोलॉजिकल एसोसिएशन (SAMA) तथा इंडियन मेट्रोलॉजिकल सोसाइटी (IMS) जयपुर चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
बढ़ता तापमान और हीट वेव गंभीर चुनौती: मुख्य अतिथि
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान के क्लाइमेट चेंज नोडल अधिकारी व अतिरिक्त निदेशक (हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) डॉ. नरोत्तम शर्मा थे। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के भूभौतिकी विभाग के पूर्व एचओडी एवं इंडियन मेट्रोलॉजिकल सोसाइटी के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव भाटला तथा महिला हाउसिंग सेवा ट्रस्ट की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर रचना शर्मा उपस्थित रहीं।
समारोह को संबोधित करते हुए मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने राजस्थान के संदर्भ में एक बेहद चिंताजनक तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य में हीट वेव (लू) की आवृत्ति (Frequencies) और तीव्रता (Intensity) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे निपटने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाना अनिवार्य है।
8 तकनीकी सत्रों में मंथन: स्वास्थ्य, श्रमिक और अर्बन कूलिंग पर चर्चा
दो दिनों तक चली इस कार्यशाला में कुल आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने हीट वेव के मानव स्वास्थ्य, शहरी क्षेत्रों, दैनिक श्रमिकों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की।
कार्यशाला में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर रणनीतिक रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया गया:
- हीट एक्शन प्लान (Heat Action Plan): जिला और राज्य स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना लागू करना।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System): मौसम विभाग की सटीक चेतावनियों को आम जनमानस तक समय पर पहुंचाना।
- सामुदायिक भागीदारी: समाज के सबसे कमजोर तबके (जैसे निर्माण श्रमिक और स्ट्रीट वेंडर्स) को जागरूक करना।
- व्यावहारिक कूलिंग समाधान: शहरी क्षेत्रों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ के प्रभाव को कम करने के लिए कूल रूफ और हरित क्षेत्रों को बढ़ावा देना।
इन तकनीकी सत्रों में स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरिंदम दास, महिला हाउसिंग ट्रस्ट की गर्गी असोदरिया, एनआरडीसी (NRDC) की डॉ. ऋतिका कपूर, खुशी बेबी के इंजीनियर साकेत कुमार और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के प्रो. अश्वनी कुमार ने मुख्य वक्ता के तौर पर अपने शोध और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए।
अकादमिक और प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता
कार्यशाला के संयोजक डॉ. दिव्य प्रकाश ने इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को हीट वेव से बचाव एवं आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की आधुनिक तकनीकों के प्रति प्रशिक्षित करना है।
पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. सुरेश चंद्र पाढ़ी ने अपने संबोधन में कहा:
”वर्तमान समय में हीट वेव केवल मौसम का मिजाज नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय और आर्थिक चुनौती बन चुकी है। इसके स्थायी समाधान के लिए शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों और समाज को एक साथ मिलकर काम करना होगा।”
वहीं प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. मनोज गुप्ता ने जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इस क्षेत्र में अनुसंधान (Research) को तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के एफईटी के डीन डॉ. अंकुश जैन, रजिस्ट्रार डॉ. देवेंद्र सोमवंशी तथा प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. चांदनी कृपलानी भी उपस्थित रहे।
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक, अनुसंधान और आपदा प्रबंधन संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें मुख्य रूप से एनआरडीसी (NRDC), जेएनयू (JNU) दिल्ली, शिव नादर यूनिवर्सिटी नोएडा, मणिपाल यूनिवर्सिटी, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), स्वास्थ्य विभाग और आईएमडी (IMD) के अधिकारी व वैज्ञानिक शामिल हुए।
समारोह के समापन पर भारत मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक हिंमाशु शर्मा ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।