हाड़ौती की ‘भाग्यरेखा’ बनेगी परवन परियोजना; पूर्ववर्ती सरकार की अनियमितताओं पर होगी सख्त कार्रवाई

हाड़ौती की ‘भाग्यरेखा’ बनेगी परवन परियोजना; पूर्ववर्ती सरकार की अनियमितताओं पर होगी सख्त कार्रवाई

| नरेश गुनानी

जयपुर, 27 फरवरी 2026: राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने शुक्रवार को विधानसभा में परवन वृहद परियोजना को कोटा, झालावाड़ और बारां जिलों के लिए ‘जीवनदायिनी’ करार दिया। प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रमोद जैन ‘भाया‘ द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार इस परियोजना को गुणवत्ता के साथ तेजी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

​अनियमितताओं पर निष्पक्ष जांच और वसूली का ऐलान

​सुरेश सिंह रावत ने सदन को आश्वस्त किया कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान इस परियोजना में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं, जिसके कारण कार्य में अनावश्यक विलंब हुआ। उन्होंने घोषणा की कि:

  • ​इन सभी प्रकरणों का विस्तृत परीक्षण कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
  • ​यदि संवेदक (ठेकेदार) दोषी पाए जाते हैं, तो उनसे राशि की वसूली की जाएगी।
  • ​संलिप्त विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

​कार्यों की प्रगति: 2 साल में लगे 14 गेट

​परियोजना की वर्तमान प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान 15 में से एक भी गेट नहीं लगाया गया था। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने पिछले दो वर्षों में ही 14 गेट स्थापित कर दिए हैं और शेष एक गेट भी इसी वित्तीय वर्ष में लगा दिया जाएगा।

​देरी के मुख्य कारण और तकनीकी बाधाएं

​मंत्री ने 2017 से अब तक कार्य में आई बाधाओं का ब्यौरा देते हुए बताया कि:

  1. फाल्ट लाइन: बांध की नींव की चट्टानों में फाल्ट लाइन आने और केंद्रीय जल आयोग (CWC) से अनुमोदन मिलने में करीब 27 माह की देरी हुई।
  2. भौगोलिक चुनौतियां: बांध स्थल पर दो पहाड़ियों के बीच डायवर्जन की जगह न होना और शेरगढ़ पिकअप वीयर के बैक वाटर के कारण निर्माण प्रभावित रहा।
  3. कानूनी एवं प्रशासनिक: भूमि अवाप्ति और राजस्व रिकॉर्ड सुधार में 2-3 वर्ष लगे। साथ ही कोविड प्रतिबंधों और न्यायिक प्रकरणों ने भी गति रोकी।

​पाइपलाइन चयन और अधिकारियों का निलंबन

​सुरेश सिंह रावत ने जानकारी दी कि तत्कालीन विधायक पानाचंद मेघवाल की शिकायत पर अक्टूबर 2021 में मुख्य अभियंता सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। शिकायत में DI पाइप के स्थान पर HDPE पाइप के इस्तेमाल और गलत डिजाइन के आरोप थे।

  • ​वित्त विभाग की विशेष जांच में भी अनियमितताएं पाई गईं।
  • ​मंत्री ने सवाल उठाया कि तत्कालीन सरकार ने निलंबित अधिकारियों को महज कुछ महीनों बाद (12 जनवरी 2022) बहाल कर कार्य पुनः शुरू कर दिया था।

​संवेदकों पर कार्रवाई: 12.68 करोड़ रुपए रोके

​कार्य की धीमी गति के कारण राज्य सरकार ने तीन प्रमुख संवेदकों की कुल 12.68 करोड़ रुपए की राशि रोक ली है:

  • हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (मुंबई JV): 5.76 करोड़ (बांध एवं टनल कार्य)
  • GVPR (हैदराबाद): 5.29 करोड़ (नहर निर्माण प्रथम चरण)
  • मेघा इंजीनियरिंग-JWIL: 1.63 करोड़ (द्वितीय चरण)

पृष्ठभूमि: परवन वृहद परियोजना की पहली प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति 30 अगस्त 2013 को 2,360.43 करोड़ रुपए की जारी की गई थी। इसका शिलान्यास 17 सितंबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राहुल गांधी की उपस्थिति में हुआ था।

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