हवा महल में गूँजी इतिहास की खनक: राजस्थान के प्राचीन सिक्कों और मुद्राओं की तीन दिवसीय प्रदर्शनी शुरू
| गौरव कोचर
जयपुर। राजस्थान दिवस समारोह—2026 के गौरवमयी आयोजनों की कड़ी में राजधानी के ऐतिहासिक हवा महल स्मारक में मंगलवार से एक अनूठी प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का मुख्य विषय ‘राजस्थान के प्राचीन सिक्के और मुद्रा’ रखा गया है, जो पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

हजारों वर्षों का सफर: एक मंच पर विभिन्न कालखण्ड
यह प्रदर्शनी पर्यटकों को मानव सभ्यता और व्यापार के क्रमिक विकास से रूबरू करा रही है। इसमें प्राचीन काल से लेकर ब्रिटिश काल तक की दुर्लभ मुद्राओं को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्राओं का संग्रह देखा जा सकता है:
- प्राचीन एवं गणराज्य काल: पंचमार्क (आहत सिक्के), इंडो-ग्रीक, योद्धेय गणराज्य और विभिन्न जनजातीय सिक्के।
- साम्राज्य काल: कुषाण, उत्तर कुषाण, गुप्तकालीन स्वर्ण मुद्राएं और पश्चिम क्षत्रप काल के सिक्के।
- मध्यकाल: इण्डो-ससेनियन, गधैया, आदिवराह, घुड़सवार-नदी शैली, अजयदेव चौहान, सोमलदेवी और कलचुरी वंश की मुद्राएं।
- सल्तनत एवं मुगल काल: दिल्ली सल्तनत, जौनपुर और गुजरात के सुल्तानों के सिक्के, मुगल और उत्तर मुगलकालीन मुद्राएं।
- रियासती एवं आधुनिक काल: जयपुर रियासत के प्रसिद्ध ‘झाड़शाही’ सिक्के, ईस्ट इंडिया कंपनी, ब्रिटिश कालीन मुद्राएं और विभिन्न ऐतिहासिक मेडल व टोकन।
शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए ज्ञान का खजाना
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रदर्शनी न केवल आम पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय है, बल्कि इतिहास के शोधार्थियों (Research Scholars) के लिए भी अत्यंत लाभदायक है। सिक्कों के माध्यम से तत्कालीन समाज की आर्थिक स्थिति, धातु विज्ञान और कलात्मक अभिरुचि को समझने में मदद मिलती है।
गुरुवार तक रहेगा आयोजन
हवा महल में आयोजित यह प्रदर्शनी मंगलवार से गुरुवार (19 मार्च) तक जारी रहेगी। राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस गतिविधि का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करना है। जयपुर भ्रमण पर आने वाले देशी-विदेशी सैलानी हवा महल के दीदार के साथ-साथ इन प्राचीन मुद्राओं के जरिए राजस्थान के वैभवशाली इतिहास को करीब से देख पा रहे हैं।
