​”हर कंकर में शंकर, हर जीव में परमात्मा”: जयपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया रुद्राक्ष और राष्ट्रधर्म का महत्व

“हर कंकर में शंकर, हर जीव में परमात्मा”: जयपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया रुद्राक्ष और राष्ट्रधर्म का महत्व

| योगेश शर्मा

जयपुर। मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड इन दिनों शिवभक्ति के अनूठे रंग में रंगा हुआ है। जयपुर परिवार सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्री शिव पुराण कथा के छठे दिन बुधवार को सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा को सुनने के लिए देश भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। भक्ति का आलम यह था कि पांडाल छोटा पड़ गया और श्रद्धालु ‘हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं’ जैसे भजनों पर झूमते-नाचते नजर आए।

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

कथा स्थल पर पहुंचे देवकीनंदन ठाकुर, हुआ भव्य स्वागत

​कथा के दौरान उस समय उत्साह और बढ़ गया जब ख्यातिप्राप्त कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी शिव चर्चा श्रवण करने पहुंचे। आयोजन समिति के मुख्य व्यवस्थापक अखिलेश अत्री और मनोज पांडे ने ठाकुर जी का भावभीना स्वागत किया।

दुख में इंसान नहीं, महादेव को पुकारें

​पंडित प्रदीप मिश्रा ने व्यासपीठ से शिव महिमा का बखान करते हुए कहा कि “हर कंकर में शंकर है।” उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा:

“जीवन में तकलीफ आना आम बात है, लेकिन अपनी पीड़ा लोगों को बताने के बजाय भगवान शिव से साझा करें। जब आप महादेव पर भरोसा करते हैं, तो वे किसी न किसी रूप (मित्र, रिश्तेदार या सहायक) में आपकी मदद के लिए जरूर आते हैं।”

 

कथा के मुख्य अंश: रुद्राक्ष, राष्ट्रधर्म और महिला शिक्षा

​पंडित जी ने अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला:

  • रुद्राक्ष की महिमा: उन्होंने कहा कि जिसके गले में रुद्राक्ष होता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान आशुतोष और माता पार्वती करती हैं। आलोचनाओं से डरने के बजाय महादेव में विश्वास रखें।
  • राष्ट्रधर्म सर्वोपरि: राष्ट्रधर्म पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश पर संकट आने पर सभी को जाति-पाति से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए।
  • बेटी-बहू को पढ़ाएं: महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए पंडित जी ने आह्वान किया कि केवल बेटियों को ही नहीं, बल्कि बहुओं को भी खूब पढ़ाना चाहिए।
  • श्मशान की परिभाषा: श्मशान को ‘समान शान’ की जगह बताते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ राजा और रंक का भेद मिट जाता है, सब एक समान मिट्टी में मिल जाते हैं।

“सनातनी दिखो ही नहीं, सनातनी बनो”: देवकीनंदन ठाकुर

​इस अवसर पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जो ईश्वर, माता-पिता और देश का सम्मान करता है, वही सच्चा सपूत है। उन्होंने ‘सनातनी बनने’ पर जोर देते हुए कहा कि सत्य की तलाश ही सनातन है। उन्होंने आयोजन की भव्यता के लिए अखिलेश अत्री, मनोज पांडे और पूरी टीम की सराहना की।

चमत्कारों की गूंज: पत्रों का वाचन

​कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने देश के कोने-कोने से आए भक्तों के पत्रों का वाचन किया। पत्रों में श्रद्धालुओं ने साझा किया कि कैसे नियमित ‘एक लोटा जल’ चढ़ाने से उन्हें असाध्य बीमारियों से मुक्ति मिली और जीवन की बड़ी बाधाएं दूर हुईं।

विशेष सूचना: आज बदलेगा कथा का समय

​आयोजन समिति ने सूचित किया है कि कथा के अंतिम दिन, यानी गुरुवार को समय में बदलाव किया गया है। भक्तों की सुविधा और समापन समारोह को देखते हुए कथा सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे तक होगी।

आरती के साथ हुआ छठे दिन का विश्राम

​कथा के अंत में मुख्य यजमान पुष्पलता-घनश्याम रावत, रेणु-राकेश रावत, कार्यक्रम संयोजक राजकुमारी-जुगल किशोर डेरेवाला और अन्य पदाधिकारियों ने सपरिवार आरती उतारी।

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