हर औषधालय में मिलेंगी जरूरी दवाएं: अलवर जिले के 229 आयुर्वेदिक संस्थानों को मिली बड़ी राहत
नरेश गुनानी
15 मार्च 2025 | टेलीग्राफ टाइम्स
अलवर जिले के आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थानों के लिए राहत की खबर है। वर्षों से दवाओं की कमी से जूझ रहे आयुर्वेदिक औषधालयों और अस्पतालों को अब एकसाथ 48 प्रकार की जरूरी आयुर्वेदिक औषधियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, भरतपुर स्थित रसायनशाला से तैयार होकर आई इन दवाओं को अलवर जिले के विभिन्न केंद्रों में भेजा जा चुका है, जबकि शेष स्थानों पर आपूर्ति अगले एक सप्ताह में पूरी करने की योजना है।
दवाओं की आपूर्ति का पहला चरण पूर्ण
अब तक जिले के पांच प्रमुख ब्लॉकों—मुंडावर, किशनगढ़बास, तिजारा, कोटकासिम और रामगढ़—के औषधालयों में आवश्यक दवाएं पहुंच चुकी हैं। आपूर्ति का पहला चरण 48 औषधालयों, 4 सीएचसी-पीएचसी स्तर के केंद्रों और 2 आयुर्वेदिक अस्पतालों तक पूरा किया गया है। इन दवाओं को अस्थायी रूप से योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र अलवर में संग्रहीत किया गया है, जहां से उन्हें केंद्रवार पैक करके भेजा जा रहा है।

48 आवश्यक दवाएं उपलब्ध
जिन प्रमुख औषधियों की आपूर्ति की गई है, उनमें अभयारिष्ट, अशोकारिष्ट, त्रिफला चूर्ण, गंधक रसायन, अश्वगंधा चूर्ण, चंद्रप्रभा वटी, दशमूल क्वाथ, हरिद्राखंड, सुपारी पाक, लवंगादि वटी, मारिच्यादि तेल, और संजीवनी वटी शामिल हैं। ये औषधियां सामान्य रोगों के उपचार के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती हैं और रोगियों की प्राथमिक चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।
कई वर्षों से थी दवा आपूर्ति में बाधा
उप निदेशक डॉ. करण सिंह दहिया ने बताया कि, “पिछले कुछ वर्षों से दवाओं की मांग लगातार भेजी जा रही थी, लेकिन बजट की कमी और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं के चलते एकसाथ बड़ी मात्रा में दवाएं नहीं भेजी जा सकीं।” यह पहली बार है जब पिछले दो दशकों में इतनी व्यापक स्तर पर दवाओं की आपूर्ति की गई है।
229 आयुर्वेदिक संस्थानों को मिलेगा लाभ
अलवर जिले में आयुर्वेद विभाग के अधीन कुल 229 संस्थान संचालित हो रहे हैं, जिनमें 36 सीएचसी-पीएचसी स्तर के सेंटर, 9 ब्लॉक स्तरीय अस्पताल, 6 सामान्य आयुर्वेदिक अस्पताल, 1 योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र और 177 औषधालय शामिल हैं। इन सभी संस्थानों को लंबे समय से सीमित दवाओं की आपूर्ति के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
आमजन को मिलेगा सीधा लाभ
इस नई व्यवस्था से आमजन को अब अपने निकटतम आयुर्वेदिक केंद्र पर आवश्यक दवाएं आसानी से उपलब्ध होंगी। इससे न केवल रोगियों को राहत मिलेगी, बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था में लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा।
“अब अन्य सभी केंद्रों में भी आपूर्ति शीघ्र होगी। इससे आयुर्वेदिक उपचार के लिए जरूरी औषधियां हर संस्थान में उपलब्ध हो सकेंगी।”
– डॉ. करण सिंह दहिया, उप निदेशक, आयुर्वेद विभाग
यह पहल आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
