हरियालो राजस्थान पर्यावरण कॉन्क्लेव: पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में सरकार के ठोस कदम
जयपुर | 18 दिसंबर 2025
| नरेश गुनानी
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रकृति के प्रति सम्मान की भारतीय संस्कृति की परंपराएँ राज्य सरकार की नीतियों और अभियानों की मूल प्रेरणा हैं। उन्होंने आमजन से पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत संकल्प के रूप में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी राजस्थान को अग्रणी बनाना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री जयपुर में आयोजित हरियालो राजस्थान पर्यावरण कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। नदियाँ, पर्वत, वृक्ष, धरती और सूर्य हमारे जीवन के आधार हैं और इनका संरक्षण ही जीवन की निरंतरता सुनिश्चित करता है। प्रदेश के इतिहास में खेजड़ली का बलिदान पर्यावरण संरक्षण का सर्वोच्च उदाहरण है, जो आज भी हमें प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।

जल संरक्षण से जनभागीदारी का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और जल संकट जैसी गंभीर चुनौतियों को देखते हुए राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है।
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के माध्यम से पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जलाशयों की स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ा गया है।
वहीं, कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान के तहत प्रवासी राजस्थानियों की सहभागिता से 14 हजार से अधिक ग्राउंड वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर निर्मित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरित हरियालो राजस्थान अभियान के अंतर्गत बीते दो वर्षों में लगभग 20 करोड़ पौधों का रोपण किया गया है।
ग्रीन बजट और क्लाइमेट एक्शन प्लान
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रीन बजट जलवायु परिवर्तन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
प्रदेश में क्लाइमेट एक्शन प्लान–2030 लागू किया गया है और क्लीन व ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा रही है।
वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए प्रदेश में सतत वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से मोबाइल वैन द्वारा रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है।
सिंगल यूज प्लास्टिक और अपशिष्ट प्रबंधन
राज्य सरकार ने सर्कुलर इकोनॉमी इंसेंटिव स्कीम–2025 लागू की है। इसके तहत ई-वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट और बैटरी वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण के लिए अधिकृत इकाइयाँ संचालित की जा रही हैं।
सिंगल यूज प्लास्टिक के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है तथा रिवर्स वेंडिंग मशीनों के माध्यम से प्लास्टिक संग्रह को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राजस्थान को ग्रीन इनोवेशन हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्लीन और ग्रीन एनर्जी में अग्रणी राजस्थान
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रदेश आज 22,860 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ देश में पहले स्थान पर है।
प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 2,272 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसके परिणामस्वरूप राजस्थान के 22 जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम हुई है।
विकास और कल्याण का समन्वित रोडमैप
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने दो वर्षों में बिजली, पानी, महिला, युवा, किसान और मजदूर कल्याण को केंद्र में रखकर स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है।
रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, इंदिरा गांधी नहर, देवास परियोजना, माही बांध और सोम–कमला–अंबा परियोजना जैसी योजनाओं के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।
रोजगार सृजन की दिशा में अब तक 92 हजार नियुक्तियाँ दी जा चुकी हैं, जबकि 1 लाख 53 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।
राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए, जिनमें से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू पर ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है।
पर्यावरण संरक्षण: सामूहिक जिम्मेदारी
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। भूजल स्तर में सुधार आया है और वन क्षेत्र का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘मेरी लाइफ – सस्टेनेबल लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ पोस्टर का विमोचन किया। साथ ही, राज्य सरकार की दो वर्ष की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन आनंद कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरिजीत बनर्जी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष आलोक गुप्ता, सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल सहित बड़ी संख्या में पर्यावरणविद्, विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।