प्रभारी रेखा सोनी ने स्वयं के श्रम से तैयार बीजों से उगाए पौधे; लोगों से ली नियमित देखभाल की शपथ
योगेश शर्मा
जयपुर। हरियाली अमावस्या और सावन के पावन बुधवार के शुभ संयोग पर राजधानी जयपुर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद प्रेरणादायी और अनुकरणीय पहल देखने को मिली। ‘सावन की सखी’ ग्रुप की प्रभारी रेखा सोनी के नेतृत्व में पर्यावरण संवर्धन को समर्पित एक विशेष पौधरोपण एवं पौधा वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिससे संपूर्ण क्षेत्र का माहौल प्रफुल्लित और खुशहाल हो उठा।
खुद की मेहनत से तैयार किए पौधे
इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि रेखा सोनी ने किसी बाजार या सरकारी नर्सरी पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं के कड़े परिश्रम और समर्पण से बीजारोपण कर ये पौधे तैयार किए थे। अपने इस प्रथम प्रयास की सफलता पर उन्होंने लगभग 70 फलदार पौधों का स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों को नि:शुल्क वितरण किया। वितरित किए गए पौधों में मुख्य रूप से:
- औषधीय एवं फलदार पौधे: मीठा नीम (कढ़ी पत्ता), सीताफल, जामुन और अमरूद शामिल थे।
सांस्कृतिक सद्भावना और भावी पीढ़ी की सुरक्षा
पौधा वितरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना ही नहीं, बल्कि समाज में आपसी सद्भावना को जीवंत रखना और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, स्वस्थ व सुरक्षित पर्यावरण सौंपना था।
कार्यक्रम के दौरान रेखा सोनी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा:
”पेड़ों की रखवाली और नियमित देखभाल केवल प्रकृति के संतुलन के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि यह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वभाव दोनों को सकारात्मक बनाती है। पेड़ पौधों के बीच रहने से मन प्रफुल्लित होता है और मानसिक शांति मिलती है। जब घर के आंगन में अपने हाथों से लगाए पौधों पर फल लगते हैं, तो पूरे परिवार में एक अलग ही खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”
संकेत नहीं, लिया देखभाल का संकल्प
केवल पौधे बांटकर औपचारिकता पूरी नहीं की गई, बल्कि पौधे प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति से उनकी उचित देखभाल, समय पर खाद-पानी देने और उन्हें वटवृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने का संकल्प (वादा) भी लिया गया। ताकि ये छोटे पौधे भविष्य में छायादार एवं फलदार वृक्ष बनकर समाज को अपनी सेवाएं दे सकें।
जनमानस में सराहना
’सावन की सखी’ ग्रुप की इस जमीनी और भावनात्मक पहल की स्थानीय क्षेत्र में जमकर सराहना की जा रही है। स्थानीय निवासियों ने इसे हरियाली अमावस्या का सच्चा और सार्थक संदेश बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से अपनी दैनिक जीवनशैली में पर्यावरण संरक्षण को अपनाने और इस अभियान से जुड़ने की अपील की है।