हरित अर्थव्यवस्था की ओर कदम: नवी मुंबई में वस्त्र अपशिष्ट से बदली महिलाओं की किस्मत

आर बी चतुर्वेदी 

नवी मुंबई | 06 अप्रैल 2026

​नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) ने कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी मॉडल पेश किया है। स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के तहत बेलापुर में स्थापित देश की पहली टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (TRF) ने न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, बल्कि यह शहरी भारत के लिए रोजगार सृजन का एक नया केंद्र भी बन गई है।

​कचरा प्रबंधन की नई परिभाषा

​भारत में हर साल उत्पन्न होने वाले 78 लाख मीट्रिक टन वस्त्र कचरे को देखते हुए नवी मुंबई ने ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था’ (Circular Economy) का रास्ता चुना है। इस परियोजना के तहत पुराने कपड़ों को लैंडफिल में फेंकने के बजाय उन्हें पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण (Recycle) के योग्य बनाया जा रहा है।

​तकनीक और पारदर्शिता का संगम

​इस सुविधा की सफलता के पीछे आधुनिक तकनीक और व्यवस्थित कार्यप्रणाली का बड़ा हाथ है:

  • स्मार्ट कलेक्शन: शहर की हाउसिंग सोसाइटियों में अब तक 140 ब्रांडेड कलेक्शन बिन लगाए जा चुके हैं।
  • फाइबर पहचान: ‘कोशा’ नामक हैंडहेल्ड स्कैनर के उपयोग से कपास, पॉलिएस्टर, रेशम और ऊन की सटीक पहचान की जाती है, जिससे वैज्ञानिक वर्गीकरण आसान हो गया है।
  • डिजिटल ट्रैकिंग: एक विशेष एमआईएस (MIS) प्लेटफॉर्म के माध्यम से कपड़े के दान से लेकर उसके अंतिम उत्पाद बनने तक की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जाता है।

​सशक्त होती महिलाएं

​इस पहल का सबसे मानवीय पक्ष महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) का सशक्तिकरण है:

  1. कौशल विकास: 300 से अधिक महिलाओं को कपड़े की पहचान और ‘अपसाइक्लिंग’ (Upcycling) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
  2. आर्थिक स्वावलंबन: 150 से अधिक महिलाएं वर्तमान में 9,000 से 15,000 रुपये प्रति माह तक आय प्राप्त कर रही हैं।
  3. सृजनशीलता: पुराने कपड़ों से थैले, पाउच, और घर की सजावट का सामान बनाकर उन्हें प्रदर्शनियों में बेचा जा रहा है।

​परियोजना के प्रमुख आंकड़े

गतिविधि

उपलब्धि

वस्त्र कचरा संग्रहण

30 मीट्रिक टन

सफलतापूर्वक छंटाई

25.5 मीट्रिक टन

परिवहन रोक (Reach)

1.14 लाख से अधिक परिवार

इनोवेशन

पुराने कपड़ों से कागज बनाने का सफल प्रयोग

चुनौतियों पर जीत और भविष्य का विस्तार

​शुरुआत में जागरूकता की कमी और मिश्रित रेशों की छंटाई जैसी चुनौतियां सामने आईं, जिन्हें निरंतर जन-भागीदारी और तकनीक के माध्यम से दूर किया गया। बेलापुर की इस अंतरिम सफलता के बाद, अब कोपरखैरान में एक स्थायी और बड़े स्तर की फैसिलिटी की योजना बनाई गई है।

​यह मॉडल न केवल प्रदूषण कम कर रहा है, बल्कि श्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए सतत विकास लक्ष्य-12 की प्राप्ति की ओर देश को ले जा रहा है।

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