हमारी ज़िंदगी और वेद-शास्त्रों का सार :पं. गिरीश सारस्वत

धर्म/विशेष 


हमारी ज़िंदगी और वेद-शास्त्रों का सार

वास्तव में जन्म और मृत्यु हमारे हाथ में नहीं होते।
अगर होते, तो हम स्वयं अपने जन्म का समय चुनते, अपनी मृत्यु को टाल सकते।
अभी का ताजा उदाहरण है – एरोप्लेन दुर्घटना।
क्या उनमें से कोई भी मरना चाहता था?
आपको याद होंगे वे मासूम बच्चे, जो अपने माता-पिता के साथ मुस्कुराते हुए सेल्फी ले रहे थे।
क्या उन्होंने ऐसा अंत चाहा था?

 

जैसे जन्म और मृत्यु हमारे अधीन नहीं, उसी प्रकार जीवन में आने वाला सुख और दुःख भी हमारे वश में नहीं होता।
हमारे हाथ में केवल दो चीज़ें हैं:
👉 सद्कर्म
👉 प्रभु नाम का जाप
यही हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं।

जीवन में जब सुख आए तो विनम्रता बनाए रखें, और जब दुःख आए तो उसे अपने कर्मों का फल समझकर शांति से स्वीकार करें।
प्रभु की शरण कभी न छोड़ें।
सदैव अच्छे कर्म करते रहें।
यही वेद-शास्त्रों का सार है।

जब हम प्रभु नाम का जाप करते हैं और अच्छे कर्मों में लगे रहते हैं, तो हमारे दुःख धीरे-धीरे दूर होते हैं।
जैसे पौ फटने से पहले रात के अंधेरे में हल्की लालिमा दिखाई देती है —
वैसे ही जीवन के अंधेरे में भी प्रभु भक्ति की आभा चमकती है,
और एक दिन वह आभा उज्ज्वल आशा रूपी सूर्य बनकर हमारे समस्त दुःखों को नष्ट कर देती है।

🌅 जीवन अनमोल है। आशा की डोर को कभी मत छोड़िए।
अंधकार चाहे जितना भी गहरा हो, उजाले का सूरज अवश्य उदय होगा।

✍️  प्रख्यात ज्योतिषी पं. गिरीश सारस्वत
📞 9540393555


 

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