हमला’ या ‘समझौता’: डोनाल्ड ट्रंप की नई वैश्विक बिसात और बदलती दुनिया

गौरव कोचर 

वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल दुनिया के लिए एक पहेली बना हुआ है। मई 2026 की शुरुआत तक के घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप अब पुरानी कूटनीति की किताबों को बंद कर चुके हैं। उनकी नीति अब केवल दो ध्रुवों के इर्द-गिर्द घूम रही है: या तो पूर्ण ‘हमला’ (Aggression) या फिर एक कठोर ‘समझौता’ (Transaction)

ईरान संकट: हमले के बाद अब ‘दमघोंटू’ घेराबंदी

​इस साल फरवरी में शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बाद, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था, अब युद्ध का स्वरूप बदल गया है।

  • ताजा अपडेट: 1 मई 2026 को ट्रंप ने औपचारिक रूप से सक्रिय सैन्य हमलों को रोकने की घोषणा की, लेकिन इसे ‘शांति’ नहीं कहा जा सकता।
  • रणनीति: ट्रंप अब ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) कर रहे हैं। उनका लक्ष्य स्पष्ट है—बिना जमीन पर सेना उतारे ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर देना ताकि वह परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए दफन करने के समझौते पर हस्ताक्षर करे।

यूरोप और NATO: ‘सुरक्षा के बदले पैसा’

​ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों को साफ संदेश दे दिया है कि “मुफ्त की सुरक्षा का दौर खत्म हो गया है।”

  • सैन्य कटौती: जर्मनी से 5,000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका अपने टैक्सपेयर्स का पैसा उन देशों पर खर्च नहीं करेगा जो अपनी जीडीपी का पर्याप्त हिस्सा रक्षा पर खर्च नहीं करते।
  • व्यापार युद्ध: ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय कारों पर 25% टैरिफ लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप यूरोप को सुरक्षा और व्यापार के मोर्चे पर इतना मजबूर कर देना चाहते हैं कि वे उनकी हर शर्त मानने को तैयार हो जाएं।

‘डॉनरो सिद्धांत’: अमेरिका का नया चक्रव्यूह

​राजनीतिक विशेषज्ञ ट्रंप की मौजूदा विदेश नीति को ‘डॉनरो डॉक्ट्रिन’ (Donroe Doctrine) कह रहे हैं। यह नीति अमेरिका को दुनिया का ‘पुलिसवाला’ बनाने के बजाय उसे एक ‘क्षेत्रीय महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करती है जो केवल अपने हितों की रक्षा करती है।

  • चीन के साथ नया समीकरण: ट्रंप बीजिंग के साथ एक ‘बड़ा सौदा’ (Grand Deal) करना चाहते हैं, जिसमें वह ताइवान या दक्षिण चीन सागर जैसे मुद्दों पर रियायत के बदले अमेरिका के लिए बड़े व्यापारिक लाभ और नौकरियों की गारंटी चाहते हैं।
  • रूसी कनेक्शन: यूक्रेन के मामले में ट्रंप ने सहायता राशि को कम करते हुए रूस को बातचीत की मेज पर आने का विकल्प दिया है, जो एक बड़े क्षेत्रीय समझौते की ओर इशारा करता है।

क्या है ट्रंप का अंतिम लक्ष्य?

​डोनाल्ड ट्रंप का ‘हमला’ केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और मनोवैज्ञानिक भी है। वह अनिश्चितता को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

  1. पहला चरण: प्रतिबंधों या सैन्य धमकियों के जरिए ‘हमला’ करना।
  2. दूसरा चरण: दुश्मन या सहयोगी को अस्थिर करना।
  3. तीसरा चरण: अपनी शर्तों पर एक ऐसा ‘समझौता’ करना जो केवल अमेरिका के पक्ष में हो।

भारत के लिए क्या हैं संकेत?

​भारत के संदर्भ में ट्रंप का रुख ‘मित्रवत लेकिन व्यापारिक’ बना हुआ है। जहाँ वह रक्षा सहयोग में हमले की मुद्रा नहीं अपना रहे, वहीं एच-1बी (H-1B) वीजा और निर्यात शुल्कों को लेकर वह सख्त समझौते की फिराक में हैं।

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