सुनील शर्मा
नई दिल्ली | 02 अप्रैल 2026
आज हनुमान जयंती के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भगवान हनुमान के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से एक विशेष संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने संकटमोचन हनुमान को भक्ति और शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक बताया।
भक्ति और अटूट समर्पण के प्रतीक
अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान हनुमान केवल एक देवता नहीं, बल्कि भक्ति, शक्ति और अटूट समर्पण के अद्वितीय प्रतीक हैं। उन्होंने कामना की कि ‘महाबली’ के आशीर्वाद से उनके सभी भक्तों के जीवन में साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।
संस्कृत श्लोक के माध्यम से वंदना
प्रधानमंत्री ने पवनपुत्र हनुमान की स्तुति में प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित साझा किया, जो उनके गुणों की व्याख्या करता है:
“मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥”
श्लोक का भावार्थ:
इस श्लोक के माध्यम से उन हनुमान को नमन किया गया है जो मन के समान तेज गति वाले हैं, जिनकी गति वायु के समान है, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, जो वायुपुत्र हैं और वानर सेना के प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसे भगवान श्रीराम के दूत के चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम किया।
देशभर में उत्साह का माहौल
प्रधानमंत्री के इस संदेश ने भक्तों के बीच उत्साह का संचार किया है। आज सुबह से ही देशभर के हनुमान मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि समाज में ‘साहस’ और ‘सकारात्मकता’ जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी देता है।
