हनुमान कथा का भव्य समापन: भक्ति के सैलाब में डूबी पिंक सिटी, साध्वी लोकेशा भारती ने बताया सेवा और समर्पण का महत्व

रिपोर्ट: योगेश शर्मा, जयपुर

जयपुर। राजधानी के सी-स्कीम स्थित गुलरेश गार्डन के हनुमान मंदिर परिसर में पिछले तीन दिनों से प्रवाहित हो रही आध्यात्मिक अमृत धारा का आज भव्य समापन हुआ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित इस त्रि-दिवसीय हनुमान कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा वातावरण ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

अहंकार शून्य भक्ति ही ईश्वर का मार्ग: साध्वी लोकेशा भारती

​कथा के अंतिम सोपान पर व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए साध्वी लोकेशा भारती ने पवनपुत्र हनुमान के चरित्र की गहराइयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हनुमान जी मात्र शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि वे सेवा और निरहंकार भक्ति के उच्चतम शिखर हैं।

  • समर्पण का संदेश: साध्वी जी ने स्पष्ट किया कि सच्ची भक्ति वहीं संभव है जहाँ अहंकार का अस्तित्व समाप्त हो जाए। हनुमान जी ने अपनी अगाध शक्तियों के बावजूद स्वयं को सदैव ‘राम दूत’ और ‘दास’ ही माना।
  • गुरु की महत्ता: उन्होंने जीवन में गुरु के मार्गदर्शन को अनिवार्य बताते हुए कहा कि बिना आध्यात्मिक गुरु के, जीवन की सार्थकता और ईश्वर की प्राप्ति कठिन है।

आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ वातावरण

​समापन अवसर पर भजन-कीर्तन की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। संगीत की लहरों पर बहती राम भक्ति ने उपस्थित जनसमूह को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया। कथा के माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों, सकारात्मक परिवर्तन और आध्यात्मिकता को अपनाने का आह्वान किया गया।

​श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में भाग लिया और प्रभु भक्ति में लीन होकर अलौकिक आनंद की अनुभूति की। आयोजन के दौरान व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं और गुलरेश गार्डन का कोना-कोना श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया।

आयोजकों ने जताया आभार

​कार्यक्रम के मुख्य आयोजक राजेंद्र धाधीच ने आयोजन की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और व्यवस्थापकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा:

​”यह भव्य आयोजन शहरवासियों की अटूट श्रद्धा और सहयोग का परिणाम है। हमारा प्रयास है कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में धर्म और सेवा का संदेश निरंतर फैलता रहे।”

 

​इस समापन समारोह के साथ ही तीन दिनों से चल रहे इस आध्यात्मिक उत्सव का विधिवत समापन हुआ, जिसकी गूँज और सकारात्मक ऊर्जा श्रद्धालुओं के मानस पटल पर लंबे समय तक अंकित रहेगी।

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