जयपुर | योगेश शर्मा | राजधानी जयपुर के स्वेज फार्म स्थित निवास पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम शर्मा के सानिध्य में ‘गुरु वंदन’ कार्यक्रम का भव्य और भावपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुबह से ही पंडित शर्मा का आशीर्वाद पाने और गुरु पूजा अर्चना करने के लिए देश-विदेश से आए उनके शिष्यों व श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
देश-विदेश से जुटे शिष्य, डिजिटल माध्यम से भी जुड़ीं संगतों की आस्था
गुरुजी के शिष्य योगेन्द्र गुप्ता ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रातःकाल से ही आश्रम में गुरु वंदन और विशेष पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला शुरू हो गया था।
स्थानीय शिष्यों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में रहने वाले उनके अनुयायियों ने डिजिटल माध्यम (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/ऑनलाइन) के जरिए गुरुदेव की पूजा की, आरती उतारी और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान पूरा माहौल गुरुभक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।
गुरुजी का पावन संदेश: ‘निःस्वार्थ सेवा ही सबसे बड़ा धर्म’
इस पावन अवसर पर अंतरराष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम शर्मा ने अपने सभी शिष्यों को जीवन का सबसे अमूल्य मंत्र दिया। शिष्यों को संबोधित करते हुए गुरुदेव ने कहा:
“मनुष्य को अपने जीवन में किसी भी फल या प्रतिफल की आशा किए बिना सदैव निस्वार्थ भाव से समाज और ज़रूरतमंदों का सहयोग करते रहना चाहिए। निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही ईश्वर की सबसे सच्ची भक्ति है।”
हस्तनिर्मित तुलसी माला का वितरण
कार्यक्रम के विशेष चरण में पंडित पुरुषोत्तम शर्मा द्वारा अपने हाथों से विशेष रूप से तैयार की गई तुलसी के बारीक मणियों की मालाएं उपस्थित सभी शिष्यों को अपने कर-कमलों से उनके गले में पहनाकर बांटी गईं। तुलसी की इस दिव्य माला को प्राप्त कर सभी शिष्य अभिभूत दिखे।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आमजनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।