नरेश गुनानी
जयपुर, 5 मई 2026। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व में राजस्थान सरकार द्वारा समाज के कमजोर और उपेक्षित वर्गों के लिए ‘स्वयंसिद्धा आश्रम’ योजना एक वरदान साबित हो रही है। यह पहल उन बुजुर्गों और असहाय नागरिकों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है, जो जीवन के अंतिम पड़ाव में सहारे और गरिमापूर्ण जीवन की तलाश में हैं।
दूरदर्शी निर्णय और योजना का विस्तार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस योजना को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में रखा है। योजना की यात्रा बजट वर्ष 2024-25 से शुरू हुई, जिसमें संभाग स्तर पर 50-50 की क्षमता वाले आश्रम स्थापित करने की घोषणा की गई थी। राज्य सरकार की समावेशी सोच का प्रमाण देते हुए बजट 2025-26 में इसका विस्तार 10 नए जिलों तक कर दिया गया है।
प्रदेश के 17 जिलों में सफल संचालन
वर्तमान में राजस्थान के 17 प्रमुख जिलों में स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से इन आश्रमों का संचालन किया जा रहा है। इनमें शामिल जिले हैं:
- अजमेर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर और सीकर।
- बालोतरा, ब्यावर, चूरू, डीग, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, फलौदी और सलूम्बर।
इन आश्रमों का मुख्य उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को परिवार जैसा सुरक्षित और सक्रिय वातावरण प्रदान करना है। यहाँ आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र, चिकित्सा और मनोरंजन जैसी समस्त सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
किसे मिलेगा प्रवेश? (पात्रता के मापदंड)
योजना के नियम अत्यंत सरल और मानवीय रखे गए हैं:
- वरिष्ठ नागरिक: ऐसे पुरुष जिनकी आयु 58 वर्ष या उससे अधिक है, और महिलाएँ जिनकी आयु 55 वर्ष या उससे अधिक है।
- असहाय/निराश्रित: ऐसे व्यक्ति जो किसी भी प्रकार के सहारे से वंचित हैं, संतानहीन हैं या अपने ही परिवार द्वारा प्रताड़ित हैं। महत्वपूर्ण: इस योजना के लिए किसी भी राज्य के नागरिक पात्र हो सकते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया: पारदर्शी और भेदभाव रहित
आश्रम में प्रवेश के लिए जाति, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। आवेदन प्रक्रिया इस प्रकार है:
- इच्छुक व्यक्ति सीधे जिला स्तरीय अधिकारी को आवेदन कर सकते हैं।
- जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी या जिला अधिकारी द्वारा जांच और अनुशंसा की जाती है।
- प्रशासनिक अनुमोदन के पश्चात ही प्रवेश की प्रक्रिया पूरी होती है।
वित्तीय प्रावधान और सुदृढ़ व्यवस्था
योजना के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने मजबूत वित्तीय ढांचा तैयार किया है:
- मैस भत्ता: प्रति आवासी 3,250 रुपये प्रतिमाह का प्रावधान।
- अनावर्तक व्यय: प्रत्येक 5 वर्ष में 10,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता।
- इसके अलावा, भवन किराया और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है।
सकारात्मक बदलाव के आंकड़े
वर्तमान में प्रदेश भर में 483 से अधिक बुजुर्ग और असहाय नागरिक इन आश्रमों में लाभान्वित हो रहे हैं। यह संख्या केवल आंकड़ों का समूह नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों जीवनों की कहानी है जहाँ अब असुरक्षा की जगह सम्मान और अकेलेपन की जगह अपनेपन ने ले ली है।
स्वयंसिद्धा आश्रम योजना वास्तव में एक ऐसे संवेदनशील समाज की दिशा में बढ़ता कदम है, जहाँ हर व्यक्ति को, चाहे उसकी परिस्थितियाँ कैसी भी हों, सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।