योगेश शर्मा
जयपुर। स्वदेशी जागरण मंच, जयपुर प्रांत का दो दिवसीय ‘कार्यकर्ता विचार एवं प्रशिक्षण वर्ग’ श्यामपुर स्थित बुहारिया वाटिका के प्रताप कॉलेज परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस दो दिवसीय आयोजन का मुख्य केंद्र बिंदु ‘विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047’ की संकल्पना रहा। प्रशिक्षण वर्ग में जयपुर प्रांत के कुल 136 दायित्ववान कार्यकर्ताओं का पंजीयन हुआ, जिनमें से 97 प्रमुख कार्यकर्ताओं ने सक्रिय रूप से सहभागिता की।
8 सत्रों में हुआ गहन मंथन, विभिन्न आयामों पर मिला मार्गदर्शन
प्रशिक्षण वर्ग के दौरान कुल 8 विभिन्न वैचारिक और व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में राष्ट्र निर्माण और जमीनी स्तर पर कार्य करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया:
- स्वदेशी एवं स्वावलंबन: स्वदेशी विचार, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और उद्यमिता को बढ़ावा देना।
- कृषि एवं पर्यावरण: जैविक एवं पारंपरिक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत।
- सफलता के विविध मंच: एक्सपोर्ट फोरम, स्वदेशी व्यापारी मंच, टीम-11 और स्वदेशी मेला।
- संगठन एवं समाज: कार्यकर्ता नेतृत्व विकास के साथ-साथ युवा, महिला एवं वरिष्ठ नागरिक आयामों की सहभागिता।
इन सभी महत्वपूर्ण विषयों पर अखिल भारतीय, राजस्थान क्षेत्र तथा जयपुर प्रांत के वरिष्ठ और अनुभवी दायित्ववान कार्यकर्ताओं ने उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया।
उद्घाटन सत्र में दिग्गजों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांत संघचालक माननीय महेंद्र सिंह मग्गो, स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठक एवं वरिष्ठ प्रचारक कश्मीरी लाल, एक्सपोर्ट फोरम के सचिव अनिल वर्मा, क्षेत्र संयोजक सतीश आचार्य, स्वावलंबी भारत अभियान के क्षेत्र समन्वयक लोकेन्द्र सिंह नरूका, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुदेश सैनी, प्रांत संयोजक सुरेंद्र नामा, प्रांत सहसंयोजक विनोद पाल यादव एवं प्रांत समन्वयक दिनेश चंद्र शर्मा मंचासीन रहे।
’स्वदेशी विचार और उद्यमिता से ही भारत बनेगा विश्व पटल पर अग्रणी’
मुख्य वक्ता के रूप में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल ने कहा:
”विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में देश के युवाओं, उद्यमियों तथा स्वदेशी कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। स्वदेशी विचार, स्थानीय वस्तुओं के उपयोग, उद्यमिता एवं स्वावलंबन के माध्यम से ही भारत विश्व पटल पर एक बार फिर अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।”
उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्गों से निकले कार्यकर्ता स्वदेशी के विचार को जन-जन तक पहुंचाकर राष्ट्र को सशक्त बनाएंगे।
वहीं, प्रांत संघचालक महेंद्र सिंह मग्गो ने आह्वान किया कि प्रत्येक कार्यकर्ता को इसकी शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। कार्यकर्ता अपने आसपास और समाज में ‘स्वदेशी संकल्पित परिवारों’ की अवधारणा को विकसित करें। स्वावलंबी भारत अभियान के क्षेत्र समन्वयक लोकेन्द्र सिंह नरूका ने युवाओं को नौकरी की मानसिकता से बाहर निकलकर उद्यमिता एवं स्वरोजगार आधारित गतिविधियों से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने की बात कही।
समाज में स्वदेशी आधारित विकास मॉडल स्थापित करना मुख्य लक्ष्य
प्रांत संयोजक सुरेंद्र नामा ने प्रशिक्षण वर्ग के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस वर्ग का उद्देश्य केवल वैचारिक चर्चा तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि समाज के धरातल पर स्वदेशी आधारित विकास मॉडल को पूरी तरह स्थापित करना है। तभी हम भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन देख सकेंगे। उन्होंने इसे हर कार्यकर्ता का नैतिक दायित्व बताया।
तहसील और नगर स्तर तक होगा संगठन का विस्तार
समापन सत्र में राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल ने आगामी कार्ययोजना पर जोर देते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि वे नियमित प्रवास, आपसी सहयोग और बेहतर समन्वय के माध्यम से संगठन का विस्तार अब तहसील और नगर स्तर तक करें। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने स्वदेशी, स्वावलंबी और विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लिया।