स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्यामानंद वर्मा की 107वीं जयंती पर श्रद्धांजलि सभा, सेनानी उत्तराधिकारी परिवार ने किया स्मरण
| गणपत चौहान, छत्तीसगढ़
बिलासपुर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी परिवार संगठन, बिलासपुर छत्तीसगढ़ द्वारा आज माह के प्रथम रविवार को “10 मिनट सेनानियों के नाम” कार्यक्रम के तहत नगर के महान स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी ध्वजवाहक स्व. श्यामानंद वर्मा की 107वीं जयंती पर विशेष स्मरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम सुबह 10 बजे सेनानी निवास पर प्रारम्भ हुआ, जिसमें नगरभर के सेनानी परिवारों ने सहभागिता कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने स्व. वर्मा के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि—
“मात्र 21 वर्ष की छात्रावस्था में उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष आरंभ किया। प्रयागराज में उन्हें दो बार कठोर कारावास का दंड दिया गया। उन्हें लोहे की बेड़ियों में जकड़कर यातनाएं दी गईं और बिलासपुर स्थित गोड़पारा निवास से गिरफ्तार किया गया। उनका राष्ट्र के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला अध्यक्ष डॉ. शकुंतला जितपुरे ने कहा कि आज के समय में देश के युवाओं को स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आगामी बैठक में प्रत्येक उत्तराधिकारी परिवार से कम से कम पाँच सदस्यों को जोड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के विशेष वक्ता साहित्यकार सतीश जायसवाल और समाजसेवी आनंद मिश्रा ने बिलासपुर की गौरवशाली क्रांतिकारी विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि बिलासपुर कई वीर सपूतों की भूमि रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कवि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी को भी बिलासपुर जेल में रखा गया था। उन्होंने जेल बैरक को ऐतिहासिक स्मारक घोषित करने एवं वंदे मातरम् उद्यान के संरक्षण हेतु सतत प्रयासों की आवश्यकता जताई।
कार्यक्रम का शुभारम्भ ध्वजारोहण, राष्ट्रगान एवं सेनानियों के चित्रों पर माल्यार्पण से हुआ।
इस अवसर पर संरक्षक ई. रमेंद्र राव बाबा, अध्यक्ष डॉ. शकुंतला जितपुरे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंद्र प्रकाश बाजपेयी, अशोक रज्जन वर्मा, प्रताप रज्जन वर्मा, प्रतिमा शुक्ला, डॉ. उषा किरण बाजपेयी, डॉ. रश्मि जितपुरे एवं बड़ी संख्या में सेनानी उत्तराधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम आयोजक अशोक रज्जन वर्मा ने बताया कि स्व. श्यामानंद वर्मा की वर्ष 1942 एवं 1944 में गिरफ्तारी के दौरान अंग्रेजी शासन ने उन्हें क्रूरतम यातनाएं दी थीं। उनके परिजनों— श्रीमती पुष्पलता वर्मा, कुमुद वर्मा, प्रताप रज्जन वर्मा एवं अन्य स्वजन—ने उनके त्याग को स्मरण करते हुए कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी इस धरोहर को सुरक्षित रखा जाएगा।
बैठक में सेनानी परिवारों को अन्य राज्यों में मिलने वाले अधिकारों एवं सुविधाओं पर चर्चा की गई। वहीं नगर विधायक अमर अग्रवाल द्वारा वंदे मातरम् उद्यान स्थापना तथा सेनानियों के नाम पट्टिका लगाए जाने के प्रयासों की सर्वसम्मति से सराहना की गई।
सभा के अंत में राष्ट्रनिर्माण, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा जागरूकता और जनसेवा से जुड़े आगामी कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने तथा धन्यवाद प्रस्ताव अशोक रज्जन वर्मा ने प्रस्तुत किया।
अगली बैठक 4 जनवरी 2026 (प्रथम रविवार) को वंदे मातरम् उद्यान में प्रातः 10 बजे ध्वजारोहण के साथ आयोजित होगी।
सभा जलपान के साथ सम्पन्न हुई।