स्मार्ट पुलिसिंग से बदलेगी राजस्थान की कानून-व्यवस्था: उदयपुर में डिजिटल पुलिसिंग का ‘रोडमैप’ तैयार

गौरव कोचर 

उदयपुर, 

​राजस्थान पुलिस अब पारंपरिक कार्यप्रणाली की सीमाओं को लांघकर डेटा-आधारित और तकनीक-केंद्रित ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ के युग में प्रवेश कर रही है। उदयपुर में आयोजित एक उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के निदेशक श्री आलोक रंजन और राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री राजीव शर्मा ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को आधुनिक बनाने का नया विजन और रोडमैप प्रस्तुत किया।

​1. तकनीक और मानवीय संवेदना का संगम

​कार्यशाला को संबोधित करते हुए महानिदेशक पुलिस श्री राजीव शर्मा ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट पुलिसिंग का अर्थ केवल गैजेट्स या सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं है। उन्होंने कहा, “असली स्मार्ट पुलिसिंग वह है जहाँ तकनीकी दक्षता और मानवीय संवेदनशीलता का बेहतर समन्वय हो।” डीजीपी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि तकनीक का लाभ थाने तक पहुँचने वाले अंतिम पीड़ित को मिलना चाहिए, तभी इसका वास्तविक उद्देश्य सफल होगा।

​2. CCTNS 2.0 और एकीकृत प्रणाली पर जोर

​NCRB निदेशक श्री आलोक रंजन ने भविष्य की पुलिसिंग की रूपरेखा साझा करते हुए CCTNS 2.0 और ICJS 2.0 (Inter-operable Criminal Justice System) की महत्ता पर प्रकाश डाला।

  • डेटा एकीकरण: आने वाले समय में अपराधों की जांच और अपराधियों की धरपकड़ के लिए रियल-टाइम सूचना साझाकरण को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।
  • डिजिटल रोडमैप: भविष्य में पुलिसिंग पूरी तरह से एकीकृत होगी, जिससे विभिन्न राज्यों और एजेंसियों के बीच डेटा का आदान-प्रदान सुगम हो जाएगा।

​3. नवाचार: अब मोबाइल में होगी ‘ई-बीट बुक’

​कार्यशाला का एक मुख्य आकर्षण उदयपुर रेंज के आईजी गौरव श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत ‘ई-बीट बुक’ ऐप रहा।

  • पारदर्शिता: यह ऐप पारंपरिक कागजी बीट बुक का स्थान लेगा।
  • सुलभता: अब कांस्टेबल के मोबाइल पर ही क्षेत्र की समस्त महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध होंगी, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज और पारदर्शी बनेगा।

​4. डेटा ही बनेगा अपराधियों का काल

​एसओजी (SOG) के आईजी अजयपाल लांबा ने विस्तृत प्रस्तुति देते हुए बताया कि डेटा का सही विश्लेषण कैसे अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त कर सकता है। उन्होंने जोर दिया कि ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल स्किल्स का तालमेल ही आधुनिक अपराधों, विशेषकर साइबर अपराधों से लड़ने की नींव बनेगा।

​5. कार्यशाला के मुख्य बिंदु और लक्ष्य:

    • त्वरित न्याय: पुलिस की कार्यशैली को इतना प्रभावी बनाना कि अपराधियों में भय और आमजन में विश्वास पैदा हो।
    • साइबर सुरक्षा: भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए डेटा-आधारित पुलिसिंग के लिए बल को तैयार करना।
    • संवेदनशीलता: पुलिसकर्मियों को जन-सेवा के प्रति और अधिक जवाबदेह बनाना।

अतिरिक्त समाचार संक्षेप:

  • जयपुर: महिला सुरक्षा के लिए कॉलेज में जागरूकता सेमिनार आयोजित, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता मीणा ने छात्राओं को साइबर सुरक्षा के टिप्स दिए।
  • प्रतापगढ़: ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई; मादक पदार्थ तस्कर की ₹2.50 करोड़ की संपत्ति फ्रीज।
  • भर्ती परीक्षा: डमी अभ्यर्थियों के गिरोह का भंडाफोड़, सिंधी कैंप पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गुमशुदा मोबाइल भी बरामद किया।

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