17 जून 2026/रायपुर: गनपत चौहान
मानवाधिकारों के संरक्षण और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में अग्रणी संस्था ‘सोशल फोरम ऑफ ह्यूमन राइट्स’ (SFHR) ने सफलतापूर्वक अपने संगठन के आठ वर्ष पूरे कर लिए हैं। स्थापना दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर एक भव्य राष्ट्रीय वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें देश के कोने-कोने से राष्ट्रीय व प्रांतीय पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक की अध्यक्षता और संचालन करते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष खेमसिंह चौहान ने सभी उपस्थित सदस्यों का स्वागत किया और उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:
”सोशल फोरम ऑफ ह्यूमन राइट्स ने आठ वर्षों में सफलता की जिन ऊंचाइयों को छुआ है, वह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आप सभी की निस्वार्थ सेवा, अद्वितीय लगन और कड़े परिश्रम का परिणाम है। आपके अथक प्रयासों की बदौलत ही आज इस मंच पर देश के आठ प्रमुख राज्यों के पदाधिकारी एक साथ मजबूत आवाज बनकर खड़े हैं।”
8 वर्षों की ऐतिहासिक उपलब्धियां: सामाजिक न्याय की बुलंद आवाज
राष्ट्रीय अध्यक्ष खेमसिंह चौहान ने पिछले आठ वर्षों के सफर का लेखा-जोखा साझा करते हुए बताया कि संस्था ने देश के जाने-माने कानूनी विशेषज्ञों (लीगल एक्सपर्ट्स) और नामचीन एनजीओ के सहयोग से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और जागरूकता अभियानों को अमलीजामा पहनाया है। संस्था द्वारा चलाए गए प्रमुख अभियानों की सूची इस प्रकार है:
- नागरिक और मौलिक अधिकार: सूचना का अधिकार (RTI), अपने मौलिक अधिकारों को जानिए, आपराधिक कानून के अंतर्गत नागरिकों के अधिकार।
- महिला सशक्तिकरण व सुरक्षा: भारत में महिलाओं का सशक्तिकरण, महिला दिवस पर “Choose to Challenge” अभियान, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा का उन्मूलन और डिजिटल पैरेंटिंग।
- बाल अधिकार एवं सुरक्षा: बाल मजदूरी के विरुद्ध बच्चों के अधिकार, शिक्षा का अधिकार, किशोर न्याय (Juvenile Justice), पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) और बच्चों की सुरक्षा में समाज की जिम्मेदारियां।
- सुलभ न्याय और विधिक साक्षरता: पारिवारिक विवादों का समाधान, गिरफ्तारी के समय व्यक्ति व कैदियों के अधिकार और न्यायालयों द्वारा मानवाधिकारों की समय-समय पर की गई व्याख्या।
- साइबर सुरक्षा और समसामयिक मुद्दे: साइबर अपराध से सुरक्षा व बचाव पर लगातार तीन विशेष सत्र, साइबर अपराध के विरुद्ध एहतियाती उपाय और कोविड-19 महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर राहत व जागरूकता कार्य।
भविष्य के बड़े फैसले: राष्ट्रीय लीगल सेल का गठन और राज्यों का पुनर्गठन
संस्था के काम को और अधिक पेशेवर और धारदार बनाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक घोषणाएं कीं:
- राष्ट्रीय लीगल सेल: संस्था के स्तर पर एक ‘राष्ट्रीय लीगल सेल’ का गठन किया गया है। संस्था से जुड़े देश भर के सभी अधिवक्ता (एडवोकेट्स) इसके सदस्य होंगे। इस सेल को सुचारू रूप से चलाने के लिए जल्द ही एक चेयरपर्सन और सचिव की नियुक्ति की जाएगी।
- संगठनात्मक निर्देश: सभी प्रदेश और जिला अध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे हर महीने अनिवार्य रूप से बैठक (मीटिंग) आयोजित करें और उसकी विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रीय मुख्यालय को भेजें।
- उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का विभाजन: भौगोलिक रूप से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र काफी बड़े राज्य हैं। अतः संगठन के कार्यों को सुचारू, सुदृढ़ और जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने के लिए इन दोनों राज्यों के संगठन को दो-दो भागों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया है।
महामंत्री ने प्रस्तुत की ‘सेक्रेटरी रिपोर्ट’
संस्था के राष्ट्रीय महामंत्री एम वहीद सिद्दीकी ने वार्षिक सेक्रेटरी रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने संस्था के अनुशासन की तारीफ करते हुए बताया कि प्रत्येक वर्ष 14 जून को एस.एफ.एच.आर. के स्थापना दिवस पर ‘जनरल बॉडी मीटिंग’ (GBM) और हर साल 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस पर ‘गवर्निंग काउंसिल मीटिंग’ (GCM) नियमित रूप से आयोजित की जाती है।
उन्होंने वित्तीय पारदर्शिता पर बात करते हुए कहा:
”ईश्वर की कृपा से हमारा कार्य बहुत बेहतर ढंग से आगे बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 तक के खातों का ऑडिट पूरी तरह संपन्न हो चुका है और वर्ष 2025-26 के ऑडिट की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। ये सभी ऑडिट रिपोर्टें आगामी नवंबर 2026 में होने वाली गवर्निग काउंसिल मीटिंग (GCM) में पटल पर रखी जाएंगी। यह सारा कार्य महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष नितिन अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन और सहयोग से पूरा किया जा रहा है।”
महामंत्री ने यह भी जानकारी दी कि पिछले वर्ष हमारा संस्थान भारत सरकार के NGO DARPAN पोर्टल पर सफलतापूर्वक पंजीकृत हो चुका है, जिससे सरकार और हमारे संगठन के बीच एक मजबूत डिजिटल समन्वय स्थापित हुआ है।
आय-व्यय का ब्यौरा और 12A व 80G मान्यता की तैयारी
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष (ट्रेजरर) शेखर शेल्के ने साल भर के आय-व्यय का पूरा ब्यौरा बैठक के सामने रखा। उन्होंने संस्था की पहुंच बढ़ाने के लिए मेंबरशिप (सदस्यता) अभियान को तेज करने की बात कही। शेल्के ने एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि संस्था ने आयकर अधिनियम की धारा 12A और 80G के अंतर्गत टैक्स छूट की मान्यता प्राप्त करने के लिए अपनी सभी सामाजिक गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को सौंप दी है, और उम्मीद है कि जल्द ही इसकी आधिकारिक स्वीकृति मिल जाएगी। इस प्रक्रिया में भी महाराष्ट्र अध्यक्ष नितिन अग्रवाल का विशेष सहयोग मिल रहा है।
देशभर के दिग्गजों ने रखे विचार
वर्चुअल बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों के अध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव और विचार साझा किए। विचार व्यक्त करने वालों में मुख्य रूप से:
- दिल्ली के अध्यक्ष रविंद्र तोमर
- महाराष्ट्र के अध्यक्ष नितिन अग्रवाल
- छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष गणपत चौहान
- उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राजकुमार चौहान
- उड़ीसा के अध्यक्ष रमेश मिश्रा
- राजस्थान के अध्यक्ष गणेश शर्मा
- उत्तर प्रदेश के सचिव अमित पांडे
- छत्तीसगढ़ के सचिव तनवीर अहमद इसके साथ ही राम अवतार शर्मा, बुधराम अग्रवाल और भीमराव शेगांवकर ने भी संगठन की मजबूती को लेकर अपनी बात रखी।
सामाजिक सरोकारों के साथ आभार प्रदर्शन
बैठक के अंतिम चरण में महाराष्ट्र के प्रदेश सचिव सफदर सिद्दीकी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने इस दौरान संस्था द्वारा किए जा रहे जमीनी कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर आम यात्रियों की सुविधा के लिए फुट ओवर ब्रिज (FOB) बनाने की मांग को लेकर रेल मंत्री और महाराष्ट्र के संबंधित मंत्रियों को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में संस्था द्वारा आयोजित किए गए शानदार ब्लड डोनेशन कैंप के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राजकुमार चौहान और उनकी पूरी टीम की जमकर सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया।
स्थापना दिवस की यह बैठक इस संकल्प के साथ समाप्त हुई कि आने वाले वर्ष में सोशल फोरम ऑफ Human Rights देश के शोषित, पीड़ित और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को और अधिक मजबूती से लड़ेगा।