सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनुभव की लाइब्रेरी, युवा पीढ़ी उनसे हर दिन कुछ नया सीखे: जस्टिस सूर्यकांत

नरेश गुनानी 

जयपुर, 25 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि समाज में बुजुर्ग और अनुभवी व्यक्ति एक ‘बावड़ी’ की तरह होते हैं, जो संकट के समय अपने अनुभव से समाधान का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की तुलना एक ‘लाइब्रेरी’ से करते हुए कहा कि एक न्यायाधीश हमेशा न्यायाधीश ही रहता है और उनकी विद्वता का लाभ आज की युवा पीढ़ी को हर दिन उठाना चाहिए।

​जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। ‘द बैंच बियोन्ड रिटायरमेंट: वैकल्पिक विवाद समाधान के संवर्धन और आम जनता में कानून के प्रति जागरूकता में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की भूमिका’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मध्यस्थता: विवादों का त्वरित और प्रेमपूर्ण समाधान

​सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा आमजन से की गई ‘कोर्ट जाने से पहले लोक अदालत जाने’ की अपील की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के जरिए किसी भी विवाद का त्वरित समाधान संभव है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी आता है।

न्यायाधीश के शब्द समाज में परिवर्तन की नींव: मुख्यमंत्री

​मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का वह मजबूत स्तंभ है जो संविधान की रक्षा के साथ हर नागरिक को समान अधिकार देती है। मुख्यमंत्री की मुख्य बातें:

  • न्याय ही प्राथमिकता: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप अब देश में ‘दंड’ के स्थान पर ‘न्याय’ को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में भारतीय दंड संहिता की जगह ‘भारतीय न्याय संहिता’ लाई गई है।
  • अमूल्य धरोहर: सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का अनुभव और न्याय-दृष्टि देश की अमूल्य धरोहर है। मध्यस्थता और सुलह से मुकदमों का बोझ कम होता है और सामाजिक समरसता बढ़ती है।
  • आधुनिकीकरण: राज्य सरकार अदालतों की संख्या बढ़ाने और न्यायालय भवनों के आधुनिकीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है ताकि हर व्यक्ति को पारदर्शी न्याय मिल सके।

सम्मेलन के दौरान हुए प्रमुख नवाचार और विमोचन

​कार्यक्रम में न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ और आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:

  1. यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम: राजस्थान हाईकोर्ट के इस डिजिटल नवाचार को लॉन्च किया गया, जिससे केस ट्रैकिंग और प्रबंधन में सुगमता आएगी।
  2. पुस्तक विमोचन: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लिखे गए महत्वपूर्ण लेखों (आर्टिकल्स) की संकलन पुस्तक का विमोचन किया गया।
  3. मल्टी यूटिलिटी वाहन: विधिक सेवाओं को दूर-दराज के क्षेत्रों तक सशक्त और सुलभ बनाने के लिए विशेष वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

लोक अदालत और रालसा की भूमिका

​राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) आमजन को जागरूक करने में प्रभावी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अनुभव का लाभ उठाकर पुराने विवादों का निस्तारण तेजी से किया जा रहा है।

उपस्थिति:

इस गरिमामय अवसर पर उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी, राजस्थान हाईकोर्ट के विभिन्न न्यायाधीश, एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज के पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विधि विद्यार्थी मौजूद रहे।

“न्यायाधीश केवल मुकदमे नहीं सुनते, बल्कि वे उस हर व्यक्ति की उम्मीद होते हैं जिसे न्याय की जरूरत होती है। उनके फैसले करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाते हैं।” > — भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री

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