सेनानी परिवार ने “वन्दे मातरम्” का किया सामूहिक गायन
गणपत चौहान • छत्तीसगढ़
150वीं जयंती पर बंकिम चंद्र चटर्जी को दी श्रद्धांजलि
बिलासपुर। ज़िला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी परिवार संगठन द्वारा शुक्रवार को राष्ट्रीय गीत “वन्दे मातरम्” की 150वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) किरण बाजपेयी के नेतृत्व में सेनानी परिवारों ने सामूहिक रूप से “वन्दे मातरम्” का गायन किया और राष्ट्रगीत के रचयिता स्व. बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा भारत माता, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम सेनानी वीर नारायण सिंह बिनझवार की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने कहा कि “वन्दे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। इस गीत ने अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ आज़ादी की चिंगारी को प्रज्वलित किया और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को बलिदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि यह गीत 7 नवंबर 1875 को बंगदर्शन पत्रिका में पहली बार प्रकाशित हुआ था, और तब से यह भारत की राष्ट्रीय पहचान और देशभक्ति का स्थायी प्रतीक बना हुआ है।
ज़िला अध्यक्ष डॉ. शकुंतला जितपुरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि “वन्दे मातरम्” हर भारतीय के दिल में देशभक्ति और एकता का भाव जगाता है। यह गीत आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता की प्रेरणा देता है और नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम से जोड़ने का माध्यम है।
कार्यक्रम में चन्द्र प्रकाश बाजपेयी, डॉ. शकुंतला जितपुरे, डॉ. रश्मि जितपुरे, डॉ. उषा किरण बाजपेयी, डॉ. शिवनाथ श्रीवास, हनी शुक्ला, शेलेश कुमार शुक्ला, सोनम साहू, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, गिरीश अग्रवाल, नरेश नायडू, शत्रुघन सोनी, प्रो. किरण बाजपेयी, किरण शुक्ला, नीरज तिवारी, मनहरन, मनोज सिंह एवं राम नारायण पटेल सहित बड़ी संख्या में सेनानी परिवार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने किया, जबकि डॉ. रश्मि जितपुरे ने आभार व्यक्त किया।
अंत में सभी उत्तराधिकारियों ने पारंपरिक “छत्तीसगढ़िया जल पान” का आनंद लेते हुए कार्यक्रम का समापन किया।