सृजन सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हुई पुष्कर अरण्य प्रदक्षिणा यात्रा

सृजन सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हुई पुष्कर अरण्य प्रदक्षिणा यात्रा
300 वर्ष पुरानी बावड़ी की सफाई, पौधारोपण और ग्राम प्रदक्षिणा जैसे सेवा कार्यों के साथ ग्रामीणों में जागरूकता फैला रही यात्रा

By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 22,2025

(हरिप्रसाद शर्मा)
पुष्कर/अजमेर। पुष्कर अरण्य क्षेत्र में चल रही पारंपरिक प्रदक्षिणा यात्रा मंगलवार को तीसरे दिन अपनी आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा के शिखर पर रही। इस यात्रा ने न केवल धार्मिक स्थल-स्थलों को श्रद्धा से जोड़ा, बल्कि सेवा और जनजागरण के माध्यम से गांव-गांव में सामाजिक चेतना की ज्योति भी प्रज्वलित की।

थांवला से कड़ेल तक सेवा और साधना का संगम

तीसरे दिन की यात्रा की शुरुआत थांवला गांव से पंच कुण्डीय यज्ञ के साथ हुई। इसके बाद यात्रियों ने थानेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया और योगी भृत्तीहरि के आश्रम भेरुजी पर सामूहिक जप का आयोजन किया। यात्रा बालाजी मंदिर, बाड़ी घाटी, तिलोरा, डूंगरिया खुर्द, रेवंत, मझेवला चौराहे होते हुए कड़ेल पहुंची। वहाँ शेषनाग मंदिर पर दर्शन के बाद ग्राम प्रदक्षिणा की गई और अंततः विश्राम स्थल मझेवला विद्यालय में दिन का विश्राम किया गया।

सेवा कार्यों की मिसाल बनी यात्रा

इस दिन यात्रा के दौरान टहला गांव में स्थित 300 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी की सफाई कर एक बड़ी सेवा कार्य संपन्न किया गया। यह बावड़ी संत नरसिंह दास बाराहाट की तपोस्थली मानी जाती है। साथ ही पंचायत भवन परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। कड़ेल की गौशाला विद्यालय में भी 50 बड़े पौधे लगाए गए।

Photo credit Telegraph Times

धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार

यात्रा के मार्ग में आने वाले सभी पवित्र स्थलों पर साधकों द्वारा श्रद्धा पूर्वक पूजा, सामूहिक जप और भजन कीर्तन किए गए। अब तक ढाई सौ से अधिक घरों में यज्ञ और 53 शिवालयों में अभिषेक किया जा चुका है। रास्ते में माता भगवती देवी की सवारी को साइकिल पर ले जाया गया, जिसे मीडिया प्रभारी शिवचरण चतुर्वेदी अग्रसर कर रहे हैं।

500 यात्रियों का दल, नेतृत्व में साहब सिंह फौजदार दंपति

यात्रा में लगभग 500 यात्रियों का दल भाग ले रहा है, जिसका नेतृत्व साहब सिंह फौजदार और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती राजेश्वरी देवी कर रहे हैं। यात्रा में भक्ति गीतों, भजनों और सामाजिक संवादों के साथ मनोरंजन और अध्यात्म का संतुलन बनाए रखा गया।

इतिहास और विरासत की पुनः स्थापना का संकल्प

धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि यह गांव संत और शौर्य परंपरा का जीवित प्रमाण है। उन्होंने मांग रखी कि इस क्षेत्र में ऐतिहासिक गैलरी, पैनोरमा आदि की स्थापना की जानी चाहिए ताकि यह परिक्रमा मार्ग और अधिक समृद्ध और संरक्षित हो।


 

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