नई दिल्ली: गौरव कोचर
केंद्रीय मंत्री चौहान ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को कार्यशैली में सुधार करने और सुशासन को धरातल पर उतारने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल फाइलों का तेजी से निपटारा करना ही काफी नहीं है, बल्कि परिणामों को बेहतर बनाना और फैसलों में गुणवत्ता लाना सरकार की असली प्राथमिकता है।
फाइलों के निस्तारण में ‘सकारात्मक दृष्टिकोण’ की जरूरत
बैठक को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि कोई भी नियम या फाइल समाज के कई लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए किसी भी विषय पर जल्दबाजी में नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:
- ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे फाइलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो।
- महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों पर समय रहते परस्पर चर्चा की जाए।
- निर्णय केवल कागजी न होकर परिणाममूलक होने चाहिए।
हर मोर्चे पर सक्रियता और जवाबदेही तय
केंद्रीय मंत्री चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार का कोई भी विभाग काम के मामले में पीछे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने हर स्तर पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनाने पर जोर दिया।
बैठक में विभाग के कामकाज को सुधारने के लिए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर रोडमैप तैयार करने को कहा गया:
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कार्यक्षेत्र |
अपेक्षित सुधार और रणनीति |
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शिकायत निवारण |
आम जनता की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान। |
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तकनीक और रिफॉर्म |
कामकाज में आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग और प्रशासनिक सुधार। |
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विवाद प्रबंधन |
कोर्ट केस और कानूनी मामलों का समय पर निस्तारण। |
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समन्वय और संवाद |
राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और मजबूत जनसंवाद। |
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भविष्य का लक्ष्य |
वर्ष 2047 के रोडमैप पर काम करना और उपलब्धियों का पारदर्शी प्रस्तुतीकरण। |
अंतिम छोर तक पहुंचे लाभ
चौहान ने अंत में कहा कि इन सभी प्रयासों का एकमात्र उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन को साकार करना है, ताकि सरकार की योजनाओं और निर्णयों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।