नई दिल्ली: लोकेंद्र सिंह शेखावत
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सामने आने वाली आधुनिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए बल की भूमिका को और अधिक व्यापक और समन्वित करने पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश अब केवल पारंपरिक तरीकों से अपनी सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकता। नकली करेंसी, संगठित अपराध, साइबर खतरों, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन से होने वाली हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए एक नई रणनीति के साथ काम करना होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा को एक अलग-थलग (आइसोलेटेड) जिम्मेदारी के रूप में देखने के बजाय एक क्षेत्रीय जिम्मेदारी (टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी) के रूप में देखना होगा।
’स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ से अभेद्य बनेंगी सीमाएं
अमित शाह ने घोषणा की कि भारत सरकार और गृह मंत्रालय, बीएसएफ को पूरी तरह तकनीक से लैस करने जा रहे हैं।
- एक साल में तकनीकी बदलाव: अगले एक साल के भीतर ‘स्मार्ट बॉर्डर कॉन्सेप्ट’ के तहत सीमा सुरक्षा में ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरे और अन्य नई तकनीकों को समाहित कर एक अभेद्य सुरक्षा ग्रिड बनाया जाएगा।
- 60वें साल में बड़ी शुरुआत: बीएसएफ की स्थापना के 60वें वर्ष में इस स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट के जरिए बांग्लादेश और पाकिस्तान से सटी पूरी सीमा को सुरक्षित कर दिया जाएगा।
- जवानों के लिए नया कल्याण कार्यक्रम: अगले दो महीनों के भीतर मोदी सरकार बीएसएफ और सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए एक बड़ा कार्यक्रम शुरू करेगी।
सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने के लिए बहुआयामी रणनीति
नई चुनौतियों का सामना करने के लिए गृह मंत्री ने विभिन्न बलों और प्रशासनिक निकायों के बीच एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने का आह्वान किया है:
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सहयोगी संस्थाएं |
मुख्य जिम्मेदारी और भूमिका |
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राज्य पुलिस और प्रशासन |
स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करना और जनसांख्यिकी बदलाव पर नजर रखना। |
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सुरक्षा बल और एजेंसियां |
CAPFs, सशस्त्र बल, खुफिया एजेंसियां और NCB मिलकर तस्करी व साइबर खतरों को रोकेंगे। |
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स्थानीय नेटवर्क |
गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) के साथ सीधा संवाद रखना। |
घुसपैठ और जनसांख्यिकी बदलाव के खिलाफ कड़ा रुख
गृह मंत्री ने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार न केवल घुसपैठ को रोकेगी, बल्कि देश से एक-एक घुसपैठिए को बाहर निकालेगी ताकि सीमाओं पर कृत्रिम तरीके से हो रहे जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) बदलाव को रोका जा सके।
हाई-पॉवर्ड डेमोग्राफी मिशन
सीमाओं पर जनसांख्यिकी संतुलन बनाए रखने के लिए जल्द ही एक ‘हाई-पॉवर्ड डेमोग्राफी मिशन’ कमेटी का गठन कर काम शुरू किया जाएगा। त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में अब ऐसी सरकारें हैं जो नीतिगत रूप से घुसपैठ के खिलाफ हैं, जिससे बीएसएफ को स्थानीय स्तर पर बेहतर सहयोग मिलेगा।
नया डिफेंस डॉक्ट्रिन और नक्सलवाद का अंत
अमित शाह ने कहा कि 2014 के बाद देश की रक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों का उरी, पुलवामा और पहलगाम के बाद सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से मुंहतोड़ जवाब दिया गया है। आतंकी हमलों के बाद केवल वार्ताएं करने का जमाना अब चला गया है। यह भारत का नया ‘डिफेंस डॉक्ट्रिन’ है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार के अडिग निश्चय और जवानों के शौर्य के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या देश में समाप्त हो चुकी है और भारत अब नक्सल मुक्त हो चुका है।
दुर्गम क्षेत्रों में डटे हैं 2,70,000 जवान
वर्ष 1965 में महज 25 बटालियनों के साथ शुरू हुआ बीएसएफ आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन चुका है। सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियों से लेकर कच्छ के दलदली नालों, सुंदरवन के घने जंगलों और ब्रह्मपुत्र के नदी क्षेत्रों तक यह बल देश की रक्षा में मुस्तैद है। गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे और तकनीक की मदद से इस सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।