108 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ का भव्य आगाज, कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
जयपुर
| योगेश शर्मा
राजधानी के सीकर रोड क्षेत्र में शनिवार को भक्ति और आध्यात्म का अनूठा दृश्य देखने को मिला। अवसर था कोटी होमात्मक नौदिवसीय 108 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ के भव्य शुभारंभ का। इस महायज्ञ की शुरुआत एक विशाल और मनोहारी कलश यात्रा के साथ हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को ‘राममय’ कर दिया।
मंगल कलश और पुष्प वर्षा से महका मार्ग
कलश यात्रा रोड नंबर-1 स्थित सन-मून क्षेत्र से विधि-विधान के साथ प्रारंभ हुई। यात्रा में सैकड़ों महिलाएं एक समान वेशभूषा (साड़ियों) में सिर पर मंगल कलश धारण कर सम्मिलित हुईं।
- भव्य स्वागत: सन-मून से भवानी निकेतन स्थित यज्ञ स्थल तक के मार्ग को स्वागत द्वारों से सजाया गया था। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने यात्रा पर पुष्प वर्षा कर अभिनंदन किया।
- लवाजमा: यात्रा में हाथी, घोड़े, ऊंट, बैंड-बाजे और सजे-धजे रथ आकर्षण का केंद्र रहे। आतिशबाजी और ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
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फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स
शिखर ध्वज की स्थापना और महायज्ञ का स्वरूप
यज्ञशाला में शनिवार को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ शिखर ध्वज की स्थापना की गई। इस महायज्ञ की कमान सियाराम बाबा की बगीची, डहर के बालाजी के महंत वैष्णव हरि शंकर दास महाराज वेदांती संभाल रहे हैं।
महायज्ञ के मुख्य आकर्षण:
- 108 कुंडीय हवन: नौ दिनों तक निरंतर आहुतियां दी जाएंगी।
- संत समागम: प्रतिदिन दोपहर में विख्यात संतों द्वारा कथा एवं प्रवचन के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान की वर्षा होगी।
- योग शिविर: स्वास्थ्य और अध्यात्म को जोड़ते हुए प्रतिदिन सुबह 7 बजे से योग गुरुजी द्वारा योग साधना शिविर आयोजित किया जाएगा।
- विशाल भंडारा: आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था की गई है।
दो धाराओं का अद्भुत मिलन
सीकर रोड पर शनिवार को एक दुर्लभ संयोग देखने को मिला। एक ओर श्रीराम महायज्ञ की कलश यात्रा अपनी भव्यता बिखेर रही थी, तो दूसरी ओर खाटू श्याम जी के लक्खी मेले की ओर बढ़ रहे पैदल यात्रियों के जत्थे हाथों में निशान (ध्वज) लिए झूमते-गाते गुजर रहे थे। आस्था की इन दो अलग-अलग धाराओं के मिलन ने राहगीरों और श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संस्कार और समरसता का संदेश
महायज्ञ के आयोजकों ने बताया कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि समाज में उच्च संस्कार, सेवा भावना और सामाजिक समरसता का संचार करना है। यह महायज्ञ आगामी नौ दिनों तक क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक चेतना का केंद्र बना रहेगा।
