सिन्धु सागर भवन में मनाई गई सिन्ध प्रान्त के आखिरी हिन्दू शासक महाराजा दाहिरसेन की 1356वीं जयंती
जयपुर। लोकेंद्र सिंह शेखावत। टेलीग्राफ टाइम्स
सिन्ध प्रान्त के अंतिम हिन्दू शासक सिन्धुपति महाराजा दाहिरसेन की 1356वीं जयंती मंगलवार को जयपुर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। यह आयोजन पूज्य सिन्धी सेंट्रल पंचायत जयपुर महानगर एवं भारतीय सिन्धु सभा महानगर जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में प्रताप नगर स्थित सिन्धु सागर भवन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत भवन में स्थापित महाराजा दाहिरसेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीपदान से हुई। इसके बाद सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने देशभक्ति और सिन्धी संस्कृति से जुड़े गीत व प्रस्तुतियां दीं।

सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष गिरधारीलाल मनकानी ने बताया कि महाराजा दाहिरसेन का बलिदान सिन्धी समाज और भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए विदेशी आक्रांताओं का सामना किया और प्राणों की आहुति दी।
भारतीय सिन्धु सभा के जिलाध्यक्ष विष्णु सामतानी ने कहा कि दाहिरसेन ने राष्ट्रहित के लिए मुग़ल शासकों से युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की। उनके बलिदान के बाद उनकी पत्नी लाडी बाई और पुत्रियां सूर्यकुमारी तथा परमाल ने भी मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया और अपने प्राण न्यौछावर किए। भारतीय सिन्धु सभा हर वर्ष 25 अगस्त को महाराजा दाहिरसेन जयंती को बड़े उत्साह और गौरव के साथ मनाती है।
संस्थाओं के महासचिव धर्मदास मोटवानी और अशोक छाबड़ा ने बताया कि प्रतिमा पर दीपदान के बाद सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने भाग लिया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने हाल ही में अहमदाबाद के एक स्कूल में सिन्धी हिन्दू छात्र नयन संताणी की निर्मम हत्या की कड़ी निंदा की। सभा ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए गुजरात सरकार से पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।