मुंबई / गौरव कोचर/ मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhivinayak Temple) में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का दान चोरी होने के सनसनीखेज दावे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मंदिर न्यास के ट्रस्टियों द्वारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए यह गंभीर आरोप लगाया है।
राज ठाकरे के मुख्य आरोप और दावे
महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के 20वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने मंदिर प्रशासन और सरकार पर कड़ा हमला बोला:
दान पेटी से चोरी का आरोप: राज ठाकरे ने दावा किया कि मंदिर के कुछ कर्मचारी दान पेटी में से पैसे चोरी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब तक इन कर्मचारियों को पकड़ा नहीं गया था, तब तक मंदिर में साप्ताहिक दान करीब 50 लाख रुपये या उससे कम आता था।
कार्रवाई के बाद आय में वृद्धि: संदिग्ध कर्मचारियों पर कार्रवाई के बाद केवल तीन हफ्तों के भीतर साप्ताहिक दान राशि बढ़कर करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये का चढ़ावा गायब किया जा रहा था।
उच्चस्तरीय जांच की मांग: राज ठाकरे ने 8 ट्रस्टियों द्वारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे पत्र को पढ़ते हुए इस पूरे घोटाले की एसआईटी या उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
अन्य मंदिरों का जिक्र: उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप का जिक्र करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया और युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट की सफाई
राज ठाकरे के इन गंभीर आरोपों के तुरंत बाद श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता सदा सरवणकर ने आरोपों को खारिज किया और स्पष्टीकरण दिया:
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मुद्दा |
ट्रस्ट की ओर से दी गई सफाई / बयान |
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पत्र का संदर्भ |
सदा सरवणकर के अनुसार, राज ठाकरे ने पत्र का आधा-अध अधूरा संदर्भ पढ़ा है। |
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कर्मचारियों पर कार्रवाई |
अनियमितता और चोरी के आरोप में 9 से 19 कर्मचारियों के खिलाफ मामले दर्ज कर कार्रवाई की गई है। |
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आय में बढ़ोतरी |
मंदिर प्रबंधन में सुधार और एजेंटों पर रोक के चलते वार्षिक आय 114 करोड़ रुपये से बढ़कर 182 करोड़ रुपये हो गई है। |
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ऑडिट रिपोर्ट का मामला |
शिंदे को पत्र इस उद्देश्य से लिखा गया था कि ऑडिट के समय अचानक बढ़ी हुई दान राशि पर कोई संदेह न उठे, न कि किसी 18 करोड़ के नए घोटाले की शिकायत के लिए। |
राजनीतिक मायने और प्रभाव
- महायुति सरकार पर दबाव: शिंदे-फडणवीस-पवार सरकार पर धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में पारदर्शिता को लेकर विपक्ष का हमला तेज हो गया है।
- मनसे का आक्रामक रुख: आगामी चुनावों से पहले राज ठाकरे लगातार हिंदुत्व और मंदिर प्रबंधन जैसे मुद्दों पर आक्रामक तेवर अपनाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।
- भक्तों और आम जनता में असंतोष: देश के सबसे अमीर और पूजनीय मंदिरों में से एक सिद्धिविनायक मंदिर में चोरी के आरोपों से श्रद्धालुओं में चिंता और रोष की लहर है।