योगेश शर्मा
जयपुर। अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के विशेष उपलक्ष्य में सोमवार को जयपुर के ऐतिहासिक सिटी पैलेस में एक महीने तक चलने वाले ‘सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर’ का शुभारंभ हुआ। शिविर का उद्घाटन जयपुर के महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच दीप प्रज्वलित कर किया।
यह प्रतिष्ठित शिविर 18 जून तक महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय, रंगरीत स्टूडियो एवं सरस्वती कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
”युवा पीढ़ी तक धरोहर पहुंचाना मुख्य उद्देश्य”: महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह
उद्घाटन के अवसर पर राजपरिवार प्रमुख सवाई पद्मनाभ सिंह ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
”इस शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों को राजस्थान की पारंपरिक कला, संगीत, नृत्य, भाषा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराना है। आज गुरु-शिष्य परंपरा की पावन भावना के साथ सभी गुरु और शिष्य यहां सीखने-सिखाने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं। यह मंच प्रतिभागियों को अपनी संस्कृति को न केवल समझने, बल्कि उसका व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का भी अनूठा अवसर देगा।”
उन्होंने आगे कहा कि यह आयोजन राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और उसके ज्ञान को अगली पीढ़ी तक हस्तांतरित करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
गुरुओं का सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
औपचारिक उद्घाटन से पूर्व, महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने शिविर में प्रशिक्षण देने आए सभी प्रतिष्ठित गुरुओं और प्रशिक्षकों का माला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को प्रकृति से जोड़ने के उद्देश्य से पौधे और परिंडे भी वितरित किए, ताकि भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों की मदद की जा सके।
सप्ताह के सातों दिन चलेंगी कक्षाएं
शिविर संयोजक एवं प्रख्यात वैदिक चित्रकार रामू रामदेव ने बताया कि इस शिविर में देश के प्रतिष्ठित कलाकार और विद्वान विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण देंगे।
- सोमवार से शुक्रवार: नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
- शनिवार और रविवार: विशेष व्यावहारिक कार्यशालाएं (वर्कशॉप) और पारंपरिक कलाओं पर आधारित गतिविधियां होंगी।
संग्रहालय दिवस के मौके पर उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे सभी पर्यटक स्थलों और संग्रहालयों के संरक्षण में अपना सहयोग दें तथा ऐतिहासिक धरोहरों को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचाएं।
विधाएं और प्रशिक्षण का समय (सोमवार से शुक्रवार)
शिविर के दौरान सप्ताह के पांच दिन निम्नलिखित विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा:
- कथक एवं लोकनृत्य (जयपुर घराना): डॉ. ज्योतिभारती गोस्वामी (सुबह 9:00 बजे से)
- पारंपरिक चित्रकला एवं मिनिएचर पेंटिंग (15 वर्ष से अधिक आयु हेतु): रामू रामदेव, हेमंत रामदेव एवं बाबूलाल मरोठिया (सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक)
- पोर्ट्रेट एवं स्केचिंग (10वीं कक्षा से छोटे बच्चों हेतु): ललित कुमार शर्मा (सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक)
- आला-गीला एवं आराइश (पारंपरिक भित्ति चित्रकला): डॉ. नाथूलाल वर्मा (सुबह 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक)
- थिएटर (रंगमंच की कला): डॉ. चंद्रदीप सिंह हाड़ा (दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक)
- वैदिक ज्योतिष का ज्ञान: डॉ. ब्रजमोहन खत्री (शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक)
- ध्रुपद (शास्त्रीय गायन): डॉ. मधु भट्ट तैलंग (शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक)
सप्ताहांत की विशेष कार्यशालाएं (शनिवार एवं रविवार)
शनिवार और रविवार को वीकेंड स्पेशल क्लासेस के तहत इन दुर्लभ कलाओं को सिखाया जाएगा:
- कैलीग्राफी (सुलेखन कला): अशोक वर्धन भार्गव (सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक)
- टेक्सटाइल ब्लॉक प्रिंटिंग: संतोष कुमार धनोपिया (दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक)
- ढूंढाड़ी भाषा प्रशिक्षण: कल्याण सिंह शेखावत (दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक)
- बाँसुरी वादन: आर. डी. गौड़ (शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक)
यह शिविर जयपुर के कला प्रेमियों और खासकर बच्चों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने और प्राचीन कलाओं में विशेषज्ञता हासिल करने का एक स्वर्णिम अवसर है।