योगेश शर्मा
18 जून तक चलने वाले एक माह के शिविर में देश के प्रतिष्ठित गुरु दे रहे हैं विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण
जयपुर।
गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक सिटी पैलेस में इन दिनों राजस्थान की समृद्ध लोक कलाओं और सांस्कृतिक धरोहर की गूंज है। महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय, रंगरीत स्टूडियो एवं सरस्वती कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में एक माह के सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर का शानदार आयोजन किया जा रहा है, जो 18 जून तक चलेगा।
इस शिविर की सबसे खास बात यह है कि इसमें 5 वर्ष के बच्चों से लेकर विभिन्न आयु वर्ग के कला प्रेमी और प्रतिभागी बेहद उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों को राजस्थान की पारंपरिक कला, संगीत, नृत्य, भाषा एवं समृद्ध विरासत से जोड़ना तथा उनके भीतर अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता और रुचि पैदा करना है।
नियमित सत्र और सप्ताहांत की विशेष कार्यशालाएं
शिविर संयोजक एवं वैदिक चित्रकार रामू रामदेव ने बताया कि शिविर का शेड्यूल बेहद व्यवस्थित रखा गया है:
- सोमवार से शुक्रवार: विभिन्न विधाओं के नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
- शनिवार एवं रविवार: विशेष कार्यशालाएं (Workshops) और पारंपरिक कलाओं पर आधारित अनूठी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
मिनिएचर पेंटिंग और स्कैचिंग की बारीकियां सीख रहे प्रतिभागी
शिविर में राजस्थान की विश्वप्रसिद्ध मिनिएचर पेंटिंग और स्कैचिंग को लेकर प्रतिभागियों में भारी क्रेज देखा जा रहा है:
- मिनिएचर पेंटिंग कार्यशाला: रामू रामदेव, हेमंत रामदेव एवं बाबूलाल मरोठिया के नेतृत्व में चल रही इस विधा के प्रशिक्षक हरि नारायण मारोठिया और लक्ष्मी नारायण कुमावत ने बताया कि प्रतिभागियों को सबसे पहले मिनिएचर पेंटिंग के इतिहास और बारीकियों से परिचित कराया गया। शिविर में हैंडमेड पेपर पर राधा-कृष्ण, सवाई जय सिंह और श्रीनाथजी जैसे विषयों पर कलाकृतियां बनाना सिखाया जा रहा है। इसमें ट्रेसिंग, ड्राइंग, कलर फिलिंग, डिजाइनिंग और प्राकृतिक रंगों (Natural Colors) से कोटिंग की तकनीक सिखाई जा रही है। आगे चलकर पोशाक, चेहरे की अभिव्यक्ति और शेडिंग की कला भी सिखाई जाएगी।
- स्कैचिंग और पोट्रेट विधा: प्रशिक्षक ललित कुमार शर्मा प्रतिभागियों को स्कैचेस, कैरिकेचर और पोट्रेट बनाने की कला सिखा रहे हैं। शुरुआत पेंसिल पकड़ने के तरीके, पेंसिल प्रेशर, लाइट टू डार्क शेड्स और आउटलाइन बनाने के बेसिक्स से की गई है। इसके बाद चेहरे के हाव-भाव और आंखें बनाने का अभ्यास कराया जाएगा। प्रशिक्षक के अनुसार, इस कला में निरंतर अभ्यास और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण है।
विभिन्न विधाएं और उनके विशेषज्ञ प्रशिक्षक
शिविर में देश के प्रतिष्ठित कलाकार और विद्वान अलग-अलग कलाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं:
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कार्यशाला / विधा |
मुख्य प्रशिक्षक |
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कथक एवं लोकनृत्य (जयपुर घराना) |
डॉ. ज्योतिभारती गोस्वामी |
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पारंपरिक चित्रकला एवं मिनिएचर पेंटिंग |
रामू रामदेव, हेमंत रामदेव एवं बाबूलाल मरोठिया |
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पोर्ट्रेट एवं स्केचिंग |
ललित कुमार शर्मा |
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आला-गीला एवं आराइश (भित्ति चित्र तकनीक) |
डॉ. नाथूलाल वर्मा |
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थिएटर कला (रंगमंच) |
डॉ. चंद्रदीप सिंह हाड़ा |
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वैदिक ज्योतिष |
डॉ. ब्रजमोहन खत्री |
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ध्रुपद (शास्त्रीय गायन) |
डॉ. मधु भट्ट तैलंग |
शनिवार-रविवार की विशेष कक्षाएं:
- कैलीग्राफी (सुलेखन): अशोक शर्मा
- टेक्सटाइल ब्लॉक प्रिंटिंग: संतोष कुमार धनोपिया
- ढूंढाड़ी भाषा: कल्याण सिंह शेखावत
- बांसुरी वादन: आर. डी. गौड़
सिटी पैलेस में आयोजित हो रहा यह अनूठा शिविर जयपुर वासियों और नई पीढ़ी के लिए राजस्थान की लुप्त होती और जीवंत कलाओं को करीब से जानने का एक स्वर्णिम अवसर साबित हो रहा है।