गंगटोक/नई दिल्ली, 27 मई 2026। गौरव कोचर
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में आयोजित सिक्किम विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास, पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया। राष्ट्रपति ने सिक्किम को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित होने पर वहां की सरकार और जनता को बधाई दी और युवाओं से 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में जुटने का आह्वान किया।
1. सिक्किम की संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण विश्वविद्यालय का विशेष दायित्व
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम अपनी अनूठी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और अद्भुत जैव विविधता के लिए पूरे विश्व में एक विशिष्ट पहचान रखता है।
- कंचनजंगा का महत्व: हिमालय की प्रतिष्ठित और सबसे ऊंची चोटियों में शामिल कंचनजंगा सिक्किम के लिए प्रकृति का अमूल्य उपहार है। यहाँ के लोग इस चोटी को अपनी रक्षक देवी के रूप में पूजते हैं, जो प्रकृति के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दिखाता है।
- विश्वविद्यालय की भूमिका: राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि सिक्किम विश्वविद्यालय केवल शिक्षा और अनुसंधान का केंद्र नहीं है, बल्कि इस पर क्षेत्र की स्थानीय भाषा, संस्कृति और पर्यावरण को सहेजने का विशेष दायित्व है। उन्होंने खुशी जताई कि यह विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा को स्थानीय परंपराओं और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़कर विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास कर रहा है।
2. विकास और प्रकृति का सह-अस्तित्व: देश के लिए प्रेरणा
सिक्किम के ऐतिहासिक प्रयासों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस राज्य ने पूरे देश के सामने एक मिसाल कायम की है:
- पहला पूर्ण जैविक राज्य: वर्ष 2016 में सिक्किम भारत का पहला पूर्णतः जैविक (Organic) राज्य बना था। इसने साबित कर दिया कि विकास और पर्यावरण का संरक्षण एक साथ संभव है।
- स्वच्छता और प्रतिबंध: प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगाने और पर्यावरण रक्षा की सिक्किम की नीतियां पूरे देश को प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक अपनी सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी समझे, तो देश तेजी से प्रगति करेगा।
3. पूर्ण साक्षर राज्य बनने पर दी बधाई
राष्ट्रपति ने इस बात पर गहरा गर्व व्यक्त किया कि सिक्किम अब एक पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। उन्होंने इस मील के पत्थर को हासिल करने के लिए सिक्किम सरकार और वहां के नागरिकों के कड़े परिश्रम की सराहना की और इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
4. पूर्वोत्तर का विकास और युवाओं से समाज सेवा का आह्वान
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत की समावेशी प्रगति के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र का आगे बढ़ना बेहद अनिवार्य है और यहाँ के युवाओं में अपार प्रतिभा है।
- सामूहिक भावना से काम करें: विश्वविद्यालय में विभिन्न राज्यों से आने वाले छात्रों से उन्होंने आग्रह किया कि वे एक-दूसरे के संपर्क में रहें और राष्ट्रीय विकास के लिए एकजुट होकर काम करें।
- वंचितों का कल्याण: उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपनी योग्यता और समर्पण का उपयोग समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए करें ताकि देश का समावेशी विकास हो सके।
5. आत्मनिर्भरता का साधन है शिक्षा: सफलता के मंत्र
विद्यार्थियों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए राष्ट्रपति ने शिक्षा को आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने छात्रों को जीवन में सफल होने के लिए कुछ महत्वपूर्ण मंत्र दिए:
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- स्वयं पर भरोसा: अपनी क्षमताओं पर पूरा विश्वास रखें और दूसरों के अनुभवों से सीखें।
- सहयोग की भावना: अकेले आगे बढ़ने के बजाय सहयोग और टीमवर्क के माध्यम से प्रगति हासिल करें।
- स्पष्ट रणनीति: अपने अल्पकालिक (Short-term) और दीर्घकालिक (Long-term) लक्ष्यों को तय करें और उन्हें पाने के लिए ठोस कार्यनीति बनाएं।
- विकसित भारत @2047: राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि युवा वर्ग दक्षता, समता और संधारणीयता (Sustainability) के मूल्यों को अपनाकर वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान देगा।
महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण के लिए विशेष पहल
दीक्षांत समारोह से पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गंगटोक में महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने वाली विशेष सेवाओं की शुरुआत की। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए ‘आमा दिदी बहिनी बस सेवा’ (पिंक बसें) और शहर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ‘संसाधन पुनर्प्राप्ति वाहनों’ (Resource Recovery Vehicles) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।