सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ राजस्थान सरकार की बड़ी पहल: जनजातीय अंचलों में 37 लाख से अधिक लोगों की हुई स्क्रीनिंग

जयपुर/ गौरव कोचर)मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार राज्य के जनजातीय बहुल इलाकों में सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी के उन्मूलन के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच, समयबद्ध उपचार, नियमित फॉलोअप, टीकाकरण, काउंसलिंग और जन-जागरूकता का एक मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र विकसित करना है।

​राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के तहत प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग अभियान चलाकर इस बीमारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा रही है।

​मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का प्राथमिक लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों में ऐसा स्वास्थ्य ढांचा तैयार करना है जो आने वाली पीढ़ियों को सिकल सेल एनीमिया के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रख सके। यह अभियान ‘स्वस्थ जनजातीय समाज-स्वस्थ राजस्थान’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रहा है।

​लक्ष्य के करीब पहुंचा स्क्रीनिंग अभियान (98.72% सफलता)

​दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में बीमारी की शुरुआती चरण में पहचान सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया। राजस्थान में 37.50 लाख जनजातीय आबादी की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 37.02 लाख लोगों की स्क्रीनिंग पूरी कर 98.72 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।

विभिन्न जिलों में स्क्रीनिंग के आंकड़े:

  • उदयपुर: 11,12,590
  • बांसवाड़ा: 10,39,295
  • डूंगरपुर: 8,02,150
  • प्रतापगढ़: 4,26,012
  • सिरोही: 1,63,910
  • बारां: 90,191
  • पाली: 41,216
  • चित्तौड़गढ़: 13,357
  • राजसमंद: 13,073

​बीमारी को जड़ से समाप्त करने की त्रिस्तरीय रणनीति

​राज्य सरकार इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करने के लिए जागरूकता, स्क्रीनिंग और प्रबंधन (त्रिस्तरीय रणनीति) पर काम कर रही है:

  • प्रसव-पूर्व और पारिवारिक जांच: सामुदायिक और स्कूल स्तर पर सामूहिक जांच शिविरों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं (प्रसव-पूर्व) की जांच और पारिवारिक स्क्रीनिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • जागरूकता अभियान: स्कूलों, स्थानीय समुदायों और सोशल मीडिया के माध्यम से बीमारी के लक्षणों, बचाव और जांच के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
  • पहचान से उपचार तक: स्क्रीनिंग में चिन्हित मरीजों को तुरंत आवश्यक परामर्श, हाइड्रोक्सीयूरिया थेरेपी, टीकाकरण और नियमित फॉलोअप देखभाल से जोड़ा जा रहा है।

​उदयपुर बना ‘सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस’

​जनजातीय अंचलों में इस बीमारी के बेहतर प्रबंधन और उपचार के लिए उदयपुर स्थित केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा उदयपुर केंद्र को ‘सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस फॉर सिकल सेल डिजीज’ का दर्जा दिया गया है।

​इस केंद्र में एक ही छत के नीचे नवजात शिशुओं की जांच, सघन देखभाल, टीकाकरण, फिजियोथेरेपी, काउंसलिंग, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने और चिकित्साकर्मियों के प्रशिक्षण जैसी सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

​सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस की प्रमुख उपलब्धियां

​उदयपुर के इस केंद्र के माध्यम से हजारों लोगों को सीधा लाभ मिला है:

  • ओपीडी एवं आईपीडी: अब तक 6,160 ओपीडी और 306 आईपीडी सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।
  • रोगी व वाहक पहचान: 589 सिकल सेल रोगियों और 3,000 सिकल सेल वाहकों की पहचान की गई।
  • नवजात शिशु स्क्रीनिंग: 32,000 नवजात शिशुओं की जांच में 621 नवजात पॉजिटिव पाए गए।
  • गर्भवती महिलाओं की जांच: 8,500 गर्भवती महिलाओं की एएनसी स्क्रीनिंग में 500 पॉजिटिव मामलों की पहचान हुई।
  • टीकाकरण व काउंसलिंग: 453 रोगियों का टीकाकरण किया गया, जबकि 5,893 परामर्श (काउंसलिंग) सत्र आयोजित किए गए।
  • प्रशिक्षण व प्रमाणपत्र: 1,107 स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया और 160 जरूरतमंदों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी किए गए।

​राज्य सरकार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को निरंतर विशेष प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यक्षमता को लगातार मजबूत बना रही है।

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